हिन्दू धर्म में कार्तिक को पूजा-पाठ और नियम-संयम का महीना माना गया है। इस दौरान प्रातः स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी के सामने दीप जलाने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। बहुत से श्रद्धालु पूरे महीने सात्त्विक भोजन करते हैं और नियमित रूप से मंदिर या नदी के किनारे दीपदान करते हैं।
कार्तिक कृष्ण पक्ष में करवाचौथ, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, धनतेरस और दीपावली जैसे पर्व आते हैं। दीपावली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और भैया दूज के साथ दीपोत्सव का क्रम आगे बढ़ता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य भागों में छठ पूजा भी बड़े श्रद्धाभाव से मनाई जाती है।
कार्तिक शुक्ल पक्ष में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसके बाद विवाह तथा दूसरे मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान और दीपदान किया जाता है। वाराणसी में इसी दिन देव दीपावली मनाई जाती है और गंगा के घाट असंख्य दीपों से जगमगा उठते हैं।