प्रदोष व्रत 2026–2027: तिथियाँ, पूजा का समय, विधि और कथा
प्रदोष व्रत 2026–2027 की तिथियाँ, प्रदोष काल और पूजा विधि जानें। सोम, भौम व शनि प्रदोष का परिचय, व्रत कथा, पारण नियम और सामान्य प्रश्न पढ़ें।
प्रदोष व्रत कब है? — संक्षिप्त उत्तर
प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है। इसकी मुख्य पूजा सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल में होती है। व्रत की तिथि और पूजा का समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखें।
❝नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥
— शिव पंचाक्षर स्तोत्र, श्लोक 1
इस महीने की प्रदोष व्रत कब है?
इस अक्टूबर महीने में प्रदोष व्रत की तिथियाँ:
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 23 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल द्वादशी | आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत |
हर महीने प्रदोष व्रत कब है?
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 5 जनवरी 2027 | मंगलवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी | पौष भौम प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 18 फरवरी 2027 | गुरुवार | माघ, शुक्ल द्वादशी | माघ गुरु प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 5 मार्च 2027 | शुक्रवार | माघ, कृष्ण द्वादशी | फाल्गुन प्रदोष व्रत |
| 20 मार्च 2027 | शनिवार | फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी | शनि प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 4 अप्रैल 2027 | रविवार | फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी | चैत्र प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 4 मई 2027 | मंगलवार | चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी | वैसाख प्रदोष व्रत |
| 17 मई 2027 | सोमवार | वैशाख, शुक्ल द्वादशी | वैसाख प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 17 जून 2027 | गुरुवार | ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्दशी | ज्येष्ठ प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 12 सितंबर 2027 | रविवार | श्रावण, शुक्ल द्वादशी | श्रावण भौम प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 23 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल द्वादशी | आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 21 दिसंबर 2026 | सोमवार | मार्गशीर्ष, शुक्ल द्वादशी | मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत |
| 25 दिसंबर 2027 | शनिवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी | पौष शनि त्रयोदशी |
| तारीख | दिन | तिथि / पक्ष | नाम | पारण | |
|---|---|---|---|---|---|
| 23 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल द्वादशी | आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत | 24 अक्टूबर, प्रातः* | देखें |
| 21 दिसंबर 2026 | सोमवार | मार्गशीर्ष, शुक्ल द्वादशी | मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत | 22 दिसंबर, प्रातः* | देखें |
| 5 जनवरी 2027 | मंगलवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी | पौष भौम प्रदोष व्रत | 6 जनवरी, प्रातः* | देखें |
| 18 फरवरी 2027 | गुरुवार | माघ, शुक्ल द्वादशी | माघ गुरु प्रदोष व्रत | 19 फरवरी, प्रातः* | देखें |
| 5 मार्च 2027 | शुक्रवार | माघ, कृष्ण द्वादशी | फाल्गुन प्रदोष व्रत | 6 मार्च, प्रातः* | देखें |
| 20 मार्च 2027 | शनिवार | फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी | शनि प्रदोष व्रत | 21 मार्च, प्रातः* | देखें |
| 4 अप्रैल 2027 | रविवार | फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी | चैत्र प्रदोष व्रत | 5 अप्रैल, प्रातः* | देखें |
| 4 मई 2027 | मंगलवार | चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी | वैसाख प्रदोष व्रत | 5 मई, प्रातः* | देखें |
| 17 मई 2027 | सोमवार | वैशाख, शुक्ल द्वादशी | वैसाख प्रदोष व्रत | 18 मई, प्रातः* | देखें |
| 17 जून 2027 | गुरुवार | ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्दशी | ज्येष्ठ प्रदोष व्रत | 18 जून, प्रातः* | देखें |
| 12 सितंबर 2027 | रविवार | श्रावण, शुक्ल द्वादशी | श्रावण भौम प्रदोष व्रत | 13 सितंबर, प्रातः* | देखें |
| 25 दिसंबर 2027 | शनिवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी | पौष शनि त्रयोदशी | 26 दिसंबर, प्रातः* | देखें |
* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।
प्रदोष व्रत आरंभ और समाप्ति
| तारीख | दिन | तिथि आरंभ → समाप्ति |
|---|---|---|
| 23 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | 23 अक्टूबर 8:05 PM → 24 अक्टूबर 7:06 PM |
| 21 दिसंबर 2026 | सोमवार | 21 दिसंबर 11:06 PM → 22 दिसंबर 7:53 PM |
| 5 जनवरी 2027 | मंगलवार | 4 जनवरी 11:45 PM → 6 जनवरी 2:09 AM |
| 18 फरवरी 2027 | गुरुवार | 18 फरवरी 7:57 PM → 19 फरवरी 4:44 PM |
| 5 मार्च 2027 | शुक्रवार | 5 मार्च 3:23 PM → 6 मार्च 5:33 PM |
| 20 मार्च 2027 | शनिवार | 20 मार्च 4:47 AM → 21 मार्च 2:15 AM |
| 4 अप्रैल 2027 | रविवार | 4 अप्रैल 9:56 AM → 5 अप्रैल 10:53 AM |
| 4 मई 2027 | मंगलवार | 4 मई 1:33 AM → 5 मई 1:00 AM |
| 17 मई 2027 | सोमवार | 17 मई 9:58 PM → 18 मई 9:33 PM |
| 17 जून 2027 | गुरुवार | 16 जून 8:00 AM → 17 जून 8:50 AM |
| 12 सितंबर 2027 | रविवार | 12 सितंबर 11:50 AM → 13 सितंबर 1:29 PM |
| 25 दिसंबर 2027 | शनिवार | 25 दिसंबर 4:38 AM → 26 दिसंबर 5:01 AM |
प्रदोष व्रत क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का दिन है। यह प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर रखा जाता है। दिनभर के संयम के बाद संध्या में शिव पूजन, दीप और आरती के साथ भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। इस व्रत में सूर्यास्त के आसपास होने वाली प्रदोष पूजा का विशेष महत्व है।
सप्ताह के जिस दिन प्रदोष पड़ता है, उसी के अनुसार उसका नाम भी बदल जाता है। सोमवार का प्रदोष सोम प्रदोष, मंगलवार का भौम प्रदोष और शनिवार का शनि प्रदोष कहलाता है। दिन अलग होने पर भी व्रत का मुख्य भाव शिवभक्ति, संयम और मंगल की प्रार्थना ही रहता है।
प्रदोष की तारीख तय करते समय संध्या के प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि देखी जाती है। इसलिए व्रत और पूजा का समय अपने शहर के पंचांग से मिलाना चाहिए। यहाँ प्रदोष व्रत की तिथियों के साथ पूजा विधि, कथा और पारण से जुड़ी जानकारी दी गई है।
प्रदोष व्रत को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?
| क्षेत्र / परंपरा | नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | प्रदोष व्रत |
| दक्षिण भारत | प्रदोषम |
प्रदोष व्रत व्रत विधि और नियम
प्रदोष व्रत की तैयारी सुबह से की जाती है, जबकि मुख्य पूजा संध्या के प्रदोष काल में होती है। पूजा सरल रख सकते हैं। उपलब्ध सामग्री और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार श्रद्धापूर्वक शिव आराधना करें।
सुबह व्रत का संकल्प
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का स्मरण करें। अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लें। दिन में कुछ समय नाम-जप या शिव स्तुति के लिए निकालें और व्यवहार में शांति व संयम रखें।
संध्या की पूजा
प्रदोष काल से पहले पूजा स्थान साफ करके दीप, जल, बेलपत्र, फूल और प्रसाद रख लें। शिवलिंग हो तो स्वच्छ जल से अभिषेक करें। चित्र के सामने पूजा कर रहे हों तो जल पात्र रखकर फूल अर्पित करें। माता पार्वती का भी स्मरण करें। मंदिर में पूजा करते समय वहाँ की व्यवस्था का पालन करें।
मंत्र, कथा और आरती
पूजा में “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। आप शिव पंचाक्षर स्तोत्र अथवा अपनी परंपरा के किसी शिव स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में आरती करके परिवार और सबके कल्याण की प्रार्थना करें।
उपवास और पारण
व्रत में आहार के नियम परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं। फलाहार रखने वाले अपनी परंपरा में स्वीकार्य फल और अन्य व्रत-आहार लें। प्रचलित विधि में संध्या पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। यदि आपने किसी दूसरी पारंपरिक विधि से संकल्प लिया है, तो पारण भी उसी के अनुसार करें।
प्रदोष व्रत पारण समय और नियम
- प्रचलित विधि में संध्या के प्रदोष काल में शिव पूजा और आरती के बाद व्रत खोला जाता है।
- यदि आपके परिवार या संप्रदाय में अगले दिन पारण की परंपरा है, तो उसी विधि का पालन करें।
- पारण में प्रसाद ग्रहण करके अपनी व्रत-परंपरा के अनुसार सादा सात्त्विक भोजन लें।
- प्रदोष व्रत के पारण के लिए चंद्रोदय की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं है।
- एकादशी के हरिवासर और द्वादशी-पारण के नियम प्रदोष व्रत पर लागू न करें।
प्रदोष व्रत व्रत में क्या करें क्या ना करें?
✅ क्या करें
- अपने शहर के पंचांग से प्रदोष व्रत और संध्या पूजा का समय देखें।
- सुबह स्नान करके श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
- प्रदोष काल से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लें।
- भगवान शिव के साथ माता पार्वती का भी स्मरण करें।
- शिवलिंग पर स्वच्छ जल और उपलब्ध होने पर बेलपत्र अर्पित करें।
- कुछ समय ॐ नमः शिवाय के जप में बिताएँ।
- प्रदोष कथा पढ़ें या परिवार के साथ सुनें।
- अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद की सहायता करें।
- पूजा के बाद अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद और सात्त्विक आहार लें।
⛔ क्या ना करें
- केवल सूर्योदय की तिथि देखकर प्रदोष का दिन तय न करें।
- प्रदोष काल की मुख्य पूजा को भूलकर केवल सुबह की पूजा तक सीमित न रहें।
- दूसरे शहर का पूजा समय बिना स्थान जाँचे न अपनाएँ।
- अपनी क्षमता से अधिक कठोर उपवास का संकल्प न लें।
- व्रत के दौरान नशे और मांसाहार से दूर रहें।
- कटु वचन, झगड़े और दूसरों के अपमान से बचें।
- अभिषेक और भोग की सामग्री व्यर्थ न बहाएँ।
- महँगी पूजा सामग्री जुटाने को व्रत की अनिवार्य शर्त न मानें।
- एकादशी के पारण नियमों को प्रदोष व्रत पर लागू न करें।
नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।
प्रमुख प्रदोष व्रत और उनका महत्व
मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत
सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष का अवसर, जिसमें भगवान शिव की संध्या आराधना की जाती है।
विवरण देखें →पौष भौम प्रदोष व्रत
मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष, जिसे भौम प्रदोष भी कहा जाता है।
विवरण देखें →शनि प्रदोष व्रत
शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष पर शिव-पार्वती की पूजा और व्रत की परंपरा है।
विवरण देखें →आश्विन गुरु प्रदोष व्रत
गुरुवार को आने वाला प्रदोष, जिसमें प्रदोष काल में शिव पूजन किया जाता है।
विवरण देखें →आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत
शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष, जो शिव-पार्वती की आराधना का अवसर है।
विवरण देखें →प्रदोष व्रत व्रत कथा
प्रदोष व्रत की एक प्रचलित कथा एक निर्धन ब्राह्मणी और राजकुमार धर्मगुप्त से जुड़ी है। पति की मृत्यु के बाद ब्राह्मणी अपने छोटे पुत्र का पालन-पोषण भिक्षा से करती थी। जीवन कठिन था, फिर भी उसके मन में दूसरों के लिए दया बनी हुई थी। एक दिन उसे एक असहाय बालक मिला। वह विदर्भ का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं के आक्रमण में उसका परिवार और राज्य छिन गया था। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई और अपने पुत्र की तरह उसका पालन करने लगी। अब उसके पास दो बच्चों की जिम्मेदारी थी, जबकि घर की स्थिति पहले जैसी ही थी। कुछ समय बाद ब्राह्मणी दोनों बालकों को लेकर ऋषि शांडिल्य के पास पहुँची। उसने ऋषि को अपनी कठिनाइयाँ बताईं और मार्गदर्शन माँगा। ऋषि ने उसे प्रदोष व्रत और भगवान शिव की आराधना की विधि समझाई। उनके बताए अनुसार ब्राह्मणी और दोनों बालक श्रद्धापूर्वक व्रत करने लगे। कथा आगे बताती है कि एक दिन धर्मगुप्त की भेंट अंशुमती नाम की गंधर्व कन्या से हुई। दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। बाद में अंशुमती के पिता ने भगवान शिव की प्रेरणा से उनका विवाह कराया। गंधर्वराज की सहायता से धर्मगुप्त ने अपने शत्रुओं को परास्त किया और खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। राज्य मिलने के बाद भी धर्मगुप्त उस ब्राह्मणी का उपकार नहीं भूला, जिसने कठिन समय में उसे आश्रय दिया था। उसने ब्राह्मणी और उसके पुत्र को अपने साथ सम्मानपूर्वक रखा।
भगवान शिव और माता पार्वती मंत्र
प्रदोष व्रत से जुड़े तथ्य
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०२शिव जी तथा माँ पार्वती श्मशान में निवास करते हैं, उनके निवास स्थल कैलाश पर्वत को भी एक दिव्य श्मशान ही माना गया है। इसके अलावा काश…
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प्रदोष व्रत शुभकामना संदेश
शिव नामावली 108 | भगवान शिव के 108 नाम (अर्थ सहित) | Shiv Namavali With Meaning & Jaap
सभी संदेश देखें →मंत्र, कथा और देवता
प्रदोष व्रत की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?
प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →
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