दीपावली की रात्रि में लक्ष्मी-गणेश के साथ देवी शारदा, यानी सरस्वती जी, की आराधना भी परम शुभ मानी जाती है। कार्तिक अमावस्या की संध्या वेला में, जब घर-आँगन दीप-पंक्तियों से आलोकित हो, पूजा-स्थान में माँ शारदा को श्वेत या पीले पुष्प, शुद्ध गाय का घी, और चंदन-लेप अर्पित करें। तत्पश्चात ‘ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें; मान्यता है कि इससे विद्या-बाधाएँ विलीन होती हैं और बुद्धि तेजस्वी बनती है। शास्त्रों में माँ सरस्वती को वाणी, ज्ञान व कलाओं की अधिष्ठात्री कहा गया है, अतः विद्यार्थी और विद्या-साधक इस दिवस पर विशेष तौर से उनका पूजन करें। कार्तिक की यह दीप-रात्रि आत्म-शुद्धि, धन-लक्ष्मी और विद्या-सरस्वती—तीनों का अनूठा संगम रचती है, जो जीवन को समृद्ध, सुन्दर और सप्रेम बनाती है।