कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा, जिसे त्रिपुरारी पूर्णिमा या देव दीपावली भी कहते हैं, हिंदू धर्म की मोक्षदायिनी तिथियों में प्रमुख है। कथानुसार इसी दिन शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया; देवताओं ने दीप-मालाएँ जलाकर जयघोष किया, इसलिए यह दीपावली के बाद का दूसरा प्रकाश-पर्व बना। कार्तिक को दामोदर-मास भी कहा जाता है; दामोदर, विष्णु का करुणामय रूप है, अतः क्षीरसागर-दान, चौबीस अंगुल के पात्र में दूध भरकर स्वर्ण या रजत मछली अर्पित करना, विशेष पुण्यकारी माना गया है। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा एवं आदित्य आदि देवताओं की संयुक्त कृपा इस दिन साधक को दीर्घायु, आरोग्य और समृद्धि का वर देती है। प्रातः गंगा-स्नान, तुलसी-दीपदान और दान-पुण्य से पाप क्षीण होते हैं, जबकि संध्या-वेला में घी या तिल-तेल के दीप जलाकर त्रिपुरारी शिव का स्मरण जीवन को आलोकित करता है।