अन्नकूट, जिसे गोवर्धन पूजा भी कहा जाता है, दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने इन्द्र के घमण्ड से गोकुलवासियों को बचाने हेतु गोवर्धन पर्वत उठाया; उसी स्मृति में भक्त पहाड़ी का रूप देकर विविध व्यंजन अर्पित करते हैं। सवेरे गोबर से गोवर्धन बनाकर दही, चावल, मिठाई, फूल और तुलसी चढ़ाई जाती है, फिर परिवार सहित पर्वत की सात परिक्रमा कर आरती होती है। मंदिरों में छप्पन भोग या एक सौ आठ पकवान का अन्नकूट सजाया जाता है, जिसे दोपहर बाद प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि अन्नकूट से अन्न-समृद्धि, गृहकल्याण और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा का आशीर्वाद मिलता है; साथ ही सामूहिक भोजन से समाज में समानता और बन्धुत्व की भावना बलवती होती है।