कार्तिक अमावस्या—अभ्युदयिनी अमावस्या—शरद और हेमंत के संगम पर पड़ने वाली हिंदू पंचांग की घोरतम रात है, जब दीप-मालिका का हृदय-पर्व मनाया जाता है। ब्रह्ममुहूर्त में तिल मिला जल लेकर स्नान करें, फिर यमुना या गंगा को अर्घ्य देकर पितृ-ऋण शांत करें। इसी दिन नरक चतुर्दशी स्नान का पुण्य, लक्ष्मी-पूजन का वैभव और नए व्यापार-लेखों का संकल्प एक साथ पूर्ण होते हैं। संध्या-वेला में घर, मार्ग, कुएँ-तालाब और नौ दिशाओं में तिल-तेल के दीप जलाकर अंधकार पर ज्योति की विजय का स्मरण किया जाता है। कमलासन महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें; गो-दान, अन्न-दान और दीप-दान से धन, आरोग्य और अखंड समृद्धि का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।