दीपावली हिंदू संस्कृति का दीप-महोत्सव है, जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से शुक्ल द्वितीया तक पाँच दिन चलता है। मध्य बिंदु अमावस्या-रात्रि की दीपावली है, जब निशीथ-काल में घर-घर दीप जलाकर अज्ञान के अंधकार पर आध्यात्मिक प्रकाश की विजय का उत्सव मनाया जाता है। परम्परा के अनुसार, पहले दीप-माला से पथ आलोकित कर श्री गणेश-लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है, फिर कमल, धूप-दीप, नैवेद्य और श्री सूक्त-पाठ से अनुष्ठान पूर्ण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिस अमावस्या-रात्रि में निशीथ-काल स्पष्ट उपस्थित हो, वही पूजन के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, क्योंकि उस क्षण देवी-लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण कर साधकों को समृद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और सौभाग्य प्रदान करती हैं। दीपावली आत्म-शुद्धि, सामाजिक मेल-मिलाप और उत्साह-उदात्तता का दिव्य संगम है, जो वर्ष भर के परिश्रम को उजास-भरे फल में रूपांतरित करता है।