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आवर्ती व्रत · 2026–2027

एकादशी 2026–2027: तिथि, कैलेंडर, व्रत विधि और पारण

एकादशी 2026–2027 की पूरी तिथि सूची — अगली एकादशी कब है, शुक्ल/कृष्ण पक्ष, व्रत विधि, पारण नियम, क्या खाएं और व्रत कथा। पंचांग-आधारित प्रामाणिक जानकारी।

🗓️

एकादशी कब है? — संक्षिप्त उत्तर

अगली एकादशी — अजा एकादशी, 7 सितंबर 2026 (सोमवार) को है — भाद्रपद, कृष्ण एकादशी। व्रत का पारण अगले दिन प्रातः किया जाता है। तिथि प्रारंभ-समाप्ति और सूर्योदय के अनुसार आपके शहर में तारीख़ में अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

एकादश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोः अपि — दोनों पक्षों की एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।

— ब्रह्म-वैवर्त पुराण
इस महीने — श्रावण मास

इस महीने की एकादशी कब है?

इस महीने एकादशी की कोई तिथि नहीं है। आगामी एकादशी: अजा एकादशी — 7 सितंबर 2026 (सोमवार)।

🕉️ भगवान विष्णु 📅 वर्ष में 24 तिथियाँ 🪔 व्रत एवं उपवास
महीने अनुसार

हर महीने एकादशी कब है?

तारीखदिनतिथिनाम
18 जनवरी 2027सोमवारपौष, शुक्ल एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
2 फरवरी 2027मंगलवारमाघ, कृष्ण एकादशी षटतिला एकादशी
17 फरवरी 2027बुधवारमाघ, शुक्ल एकादशीजया एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
4 मार्च 2027गुरुवारफाल्गुन, कृष्ण एकादशी विजया एकादशी
18 मार्च 2027गुरुवारफाल्गुन, शुक्ल एकादशीरंगभरनी / आमलकी एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
2 अप्रैल 2027शुक्रवारचैत्र, कृष्ण एकादशीपापमोचिनी एकादशी
2 अप्रैल 2027रविवारचैत्र, कृष्ण एकादशीवैष्णव पापमोचिनी एकादशी
17 अप्रैल 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल एकादशीकामदा एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
2 मई 2027रविवारवैसाख, कृष्ण एकादशीवरूथिनी एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
1 जून 2027मंगलवारज्येष्ठ, कृष्ण एकादशीअपरा एकादशी
14 जून 2027सोमवारज्येष्ठ, शुक्ल एकादशीनिर्जला एकादशी
29 जून 2027शुक्रवारआषाढ़, कृष्ण एकादशीयोगिनी एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
1 जुलाई 2027रविवारआषाढ़, कृष्ण एकादशीवैष्णव योगिनी एकादशी
30 जुलाई 2027रविवारश्रावण, कृष्ण एकादशी कामिका एकादशी
30 जुलाई 2027सोमवारश्रावण, कृष्ण एकादशीकामिका एकादशी व्रत
तारीखदिनतिथिनाम
12 अगस्त 2027शनिवारआषाढ़, शुक्ल एकादशीदेवशयनी एकादशी
12 अगस्त 2027मंगलवारश्रावण, शुक्ल एकादशीश्रावण पुत्रदा एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
7 सितंबर 2026सोमवारभाद्रपद, कृष्ण एकादशीअजा एकादशी
22 सितंबर 2026मंगलवारभाद्रपद, शुक्ल एकादशीपरिवर्तिनी एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
6 अक्टूबर 2026मंगलवारआश्विन, कृष्ण एकादशी इन्दिरा एकादशी
22 अक्टूबर 2026गुरुवारआश्विन, शुक्ल एकादशीपापांकुशा एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
5 नवंबर 2026गुरुवारकार्तिक, कृष्ण एकादशी रमा एकादशी
तारीखदिनतिथिनाम
4 दिसंबर 2026शुक्रवारमार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी उत्पन्ना एकादशी व्रत
23 दिसंबर 2027गुरुवारपौष, कृष्ण एकादशीसफला एकादशी
पूर्ण सूची

एकादशी सूची 2026–2027

तारीखदिनतिथि / पक्षनामपारण
7 सितंबर 2026सोमवारभाद्रपद, कृष्ण एकादशीअजा एकादशी8 सितंबर, प्रातः*देखें
22 सितंबर 2026मंगलवारभाद्रपद, शुक्ल एकादशीपरिवर्तिनी एकादशी 23 सितंबर, प्रातः*देखें
6 अक्टूबर 2026मंगलवारआश्विन, कृष्ण एकादशी इन्दिरा एकादशी7 अक्टूबर, प्रातः*देखें
22 अक्टूबर 2026गुरुवारआश्विन, शुक्ल एकादशीपापांकुशा एकादशी23 अक्टूबर, प्रातः*देखें
5 नवंबर 2026गुरुवारकार्तिक, कृष्ण एकादशी रमा एकादशी6 नवंबर, प्रातः*देखें
4 दिसंबर 2026शुक्रवारमार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी उत्पन्ना एकादशी व्रत5 दिसंबर, प्रातः*देखें
18 जनवरी 2027सोमवारपौष, शुक्ल एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी19 जनवरी, प्रातः*देखें
2 फरवरी 2027मंगलवारमाघ, कृष्ण एकादशी षटतिला एकादशी3 फरवरी, प्रातः*देखें
17 फरवरी 2027बुधवारमाघ, शुक्ल एकादशीजया एकादशी18 फरवरी, प्रातः*देखें
4 मार्च 2027गुरुवारफाल्गुन, कृष्ण एकादशी विजया एकादशी5 मार्च, प्रातः*देखें
18 मार्च 2027गुरुवारफाल्गुन, शुक्ल एकादशीरंगभरनी / आमलकी एकादशी19 मार्च, प्रातः*देखें
2 अप्रैल 2027शुक्रवारचैत्र, कृष्ण एकादशीपापमोचिनी एकादशी3 अप्रैल, प्रातः*देखें
2 अप्रैल 2027रविवारचैत्र, कृष्ण एकादशीवैष्णव पापमोचिनी एकादशी19 अप्रैल, प्रातः*देखें
17 अप्रैल 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल एकादशीकामदा एकादशी18 अप्रैल, प्रातः*देखें
2 मई 2027रविवारवैसाख, कृष्ण एकादशीवरूथिनी एकादशी3 मई, प्रातः*देखें
1 जून 2027मंगलवारज्येष्ठ, कृष्ण एकादशीअपरा एकादशी2 जून, प्रातः*देखें
14 जून 2027सोमवारज्येष्ठ, शुक्ल एकादशीनिर्जला एकादशी15 जून, प्रातः*देखें
29 जून 2027शुक्रवारआषाढ़, कृष्ण एकादशीयोगिनी एकादशी18 जून, प्रातः*देखें
1 जुलाई 2027रविवारआषाढ़, कृष्ण एकादशीवैष्णव योगिनी एकादशी9 जुलाई, प्रातः*देखें
30 जुलाई 2027रविवारश्रावण, कृष्ण एकादशी कामिका एकादशी19 जुलाई, प्रातः*देखें
30 जुलाई 2027सोमवारश्रावण, कृष्ण एकादशीकामिका एकादशी व्रत7 अगस्त, प्रातः*देखें
12 अगस्त 2027शनिवारआषाढ़, शुक्ल एकादशीदेवशयनी एकादशी29 अगस्त, प्रातः*देखें
12 अगस्त 2027मंगलवारश्रावण, शुक्ल एकादशीश्रावण पुत्रदा एकादशी19 अगस्त, प्रातः*देखें
23 दिसंबर 2027गुरुवारपौष, कृष्ण एकादशीसफला एकादशी24 दिसंबर, प्रातः*देखें

* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।

7सितंबर

अजा एकादशी

सोमवार · भाद्रपद, कृष्ण एकादशी

देखें
22सितंबर

परिवर्तिनी एकादशी

मंगलवार · भाद्रपद, शुक्ल एकादशी

देखें
6अक्टूबर

इन्दिरा एकादशी

मंगलवार · आश्विन, कृष्ण एकादशी

देखें
22अक्टूबर

पापांकुशा एकादशी

गुरुवार · आश्विन, शुक्ल एकादशी

देखें
5नवंबर

रमा एकादशी

गुरुवार · कार्तिक, कृष्ण एकादशी

देखें
4दिसंबर

उत्पन्ना एकादशी व्रत

शुक्रवार · मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी

देखें
18जनवरी

पौष पुत्रदा एकादशी

सोमवार · पौष, शुक्ल एकादशी

देखें
2फरवरी

षटतिला एकादशी

मंगलवार · माघ, कृष्ण एकादशी

देखें
17फरवरी

जया एकादशी

बुधवार · माघ, शुक्ल एकादशी

देखें
4मार्च

विजया एकादशी

गुरुवार · फाल्गुन, कृष्ण एकादशी

देखें
18मार्च

रंगभरनी / आमलकी एकादशी

गुरुवार · फाल्गुन, शुक्ल एकादशी

देखें
2अप्रैल

पापमोचिनी एकादशी

शुक्रवार · चैत्र, कृष्ण एकादशी

देखें
2अप्रैल

वैष्णव पापमोचिनी एकादशी

रविवार · चैत्र, कृष्ण एकादशी

देखें
17अप्रैल

कामदा एकादशी

शनिवार · चैत्र, शुक्ल एकादशी

देखें
2मई

वरूथिनी एकादशी

रविवार · वैसाख, कृष्ण एकादशी

देखें
1जून

अपरा एकादशी

मंगलवार · ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी

देखें
14जून

निर्जला एकादशी

सोमवार · ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी

देखें
29जून

योगिनी एकादशी

शुक्रवार · आषाढ़, कृष्ण एकादशी

देखें
1जुलाई

वैष्णव योगिनी एकादशी

रविवार · आषाढ़, कृष्ण एकादशी

देखें
30जुलाई

कामिका एकादशी

रविवार · श्रावण, कृष्ण एकादशी

देखें
30जुलाई

कामिका एकादशी व्रत

सोमवार · श्रावण, कृष्ण एकादशी

देखें
12अगस्त

देवशयनी एकादशी

शनिवार · आषाढ़, शुक्ल एकादशी

देखें
12अगस्त

श्रावण पुत्रदा एकादशी

मंगलवार · श्रावण, शुक्ल एकादशी

देखें
23दिसंबर

सफला एकादशी

गुरुवार · पौष, कृष्ण एकादशी

देखें
तिथि समय

एकादशी आरंभ और समाप्ति

तारीखदिनतिथि आरंभ → समाप्ति
7 सितंबर 2026सोमवार7 सितंबर 12:59 AM 7 सितंबर 10:33 PM
22 सितंबर 2026मंगलवार22 सितंबर 1:30 AM 23 सितंबर 3:13 AM
6 अक्टूबर 2026मंगलवार6 अक्टूबर 7:37 AM 7 अक्टूबर 6:04 AM
22 अक्टूबर 2026गुरुवार21 अक्टूबर 7:41 PM 22 अक्टूबर 8:17 PM
5 नवंबर 2026गुरुवार4 नवंबर 4:33 PM 5 नवंबर 4:05 PM
4 दिसंबर 2026शुक्रवार4 दिसंबर 4:33 AM 5 दिसंबर 5:14 AM
18 जनवरी 2027सोमवार18 जनवरी 3:56 PM 19 जनवरी 1:19 PM
2 फरवरी 2027मंगलवार1 फरवरी 2:11 PM 2 फरवरी 4:40 PM
17 फरवरी 2027बुधवार17 फरवरी 1:49 AM 17 फरवरी 11:01 PM
4 मार्च 2027गुरुवार3 मार्च 10:14 AM 4 मार्च 12:54 PM
18 मार्च 2027गुरुवार18 मार्च 9:51 AM 19 मार्च 7:21 AM
2 अप्रैल 2027शुक्रवार2 अप्रैल 6:15 AM 3 अप्रैल 8:21 AM
2 अप्रैल 2027रविवार18 अप्रैल 1:40 PM 19 अप्रैल 2:46 PM
17 अप्रैल 2027शनिवार16 अप्रैल 4:51 PM 17 अप्रैल 2:57 PM
2 मई 2027रविवार2 मई 12:23 AM 3 मई 1:21 AM
1 जून 2027मंगलवार31 मई 3:32 PM 1 जून 3:09 PM
14 जून 2027सोमवार14 जून 7:41 AM 15 जून 7:37 AM
29 जून 2027शुक्रवार17 जून 1:46 PM 18 जून 10:52 AM
1 जुलाई 2027रविवार8 जुलाई 12:48 PM 9 जुलाई 9:55 AM
30 जुलाई 2027रविवार18 जुलाई 7:29 PM 19 जुलाई 4:34 PM
30 जुलाई 2027सोमवार6 अगस्त 5:42 PM 7 अगस्त 3:05 PM
12 अगस्त 2027शनिवार28 अगस्त 2:42 PM 29 अगस्त 5:04 PM
12 अगस्त 2027मंगलवार17 अगस्त 10:57 AM 19 अगस्त 6:40 PM
23 दिसंबर 2027गुरुवार23 दिसंबर 5:10 AM 24 दिसंबर 4:41 AM
महत्व

एकादशी क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

सनातन धर्म में एकादशी तिथि (ग्यारस) प्रत्येक मास में दो बार — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में — आती है। एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष नाम और महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

वीडियो

एकादशी वीडियो

क्षेत्रीय नाम

एकादशी को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?

क्षेत्र / परंपरानाम
गुजरातअग्यारस
बंगालएकादोशी
महाराष्ट्रएकादशी
दक्षिण भारतएकादशी (Ekadasi)
उत्तर भारतग्यारस
व्रत विधि

एकादशी व्रत विधि और नियम

एकादशी (Ekadashi) व्रत कैसे प्रारंभ हुआ? भगवती एकादशी कौन है, इस संबंध में पद्म पुराण में कथा है कि एक बार पुण्यश्लोक धर्मराज युधिष्ठिर को लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त दुःखों, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाने, हजारों यज्ञों के अनुष्ठान की तुलना करने वाले, चारों पुरुषार्थों को सहज ही देने वाले एकादशी व्रत करने का निर्देश दिया।

एकादशी (Ekadashi) व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।

ये हैं एकादशी व्रत-उपवास के नियम... * दशमी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। * रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। * एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। * यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें या पुरोहितजी से गीता पाठ का श्रवण करें। * फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि 'आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूंगा।' * तत्पश्चात 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस द्वादश मंत्र का जाप करें। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम को कंठ का भूषण बनाएं। * भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करें और कहे कि- हे त्रिलोकीनाथ! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति प्रदान करना। * यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्री‍हरि की पूजा कर क्षमा मांग लेना चाहिए। * एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं। * इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें। * एकादशी (ग्यारस) के दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। * केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें। * प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए। * द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए। * क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं
पारण

एकादशी पारण समय और नियम

  • एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद किया जाता है — द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण कर लेना आवश्यक माना गया है।
  • हरि वासर (द्वादशी की प्रथम एक-चौथाई अवधि) में पारण वर्जित माना जाता है; इसके समाप्त होने की प्रतीक्षा करें।
  • पारण का शुभ मुहूर्त हर शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए अपने स्थान का पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि करें।
  • यदि द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो, तो पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है।
  • पारण सामान्यतः तुलसी-जल या सात्विक अन्न से किया जाता है।
⚠️ यहाँ कोई निश्चित घड़ी-समय नहीं दिया गया है — पारण मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और द्वादशी समाप्ति पर निर्भर करता है। कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भोजन एवं आचरण

एकादशी व्रत में क्या करें क्या ना करें?

✅ क्या करें

  • प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करें
  • दिनभर सात्विक भाव एवं ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें
  • द्वादशी को पारण समय पर व्रत खोलें
  • जरूरतमंदों को अन्न एवं जल का दान करें

⛔ क्या ना करें

  • चावल एवं अन्न का सेवन न करें
  • क्रोध, झूठ एवं निंदा से बचें
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) न लें
  • दिन में शयन न करें
  • पारण समय बीतने के बाद व्रत न खोलें

नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।

प्रमुख तिथियाँ

प्रमुख एकादशी और उनका महत्व

निर्जला एकादशी

वर्ष की सबसे कठोर एकादशी — निर्जल व्रत, सभी एकादशियों का फल

विवरण देखें →

देवशयनी एकादशी

भगवान विष्णु के शयन का आरंभ — चातुर्मास प्रारंभ

विवरण देखें →

देवउठनी एकादशी

देव जागरण — तुलसी विवाह और मांगलिक कार्यों का आरंभ

विवरण देखें →

मोक्षदा एकादशी

गीता जयंती से जुड़ी — मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी

विवरण देखें →

उत्पन्ना एकादशी

एकादशी देवी के प्राकट्य की तिथि — व्रत आरंभ के लिए श्रेष्ठ

विवरण देखें →

योगिनी एकादशी

पाप-नाश और आरोग्य के लिए फलदायी

विवरण देखें →

पुत्रदा एकादशी

संतान सुख की कामना के लिए — वर्ष में दो बार

विवरण देखें →

कामदा एकादशी

चैत्र शुक्ल — मनोकामना पूर्ण करने वाली एकादशी

विवरण देखें →
व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा

शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि स्वयं भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है — पद्म पुराण में प्रत्येक एकादशी की अपनी कथा और महिमा वर्णित है। उत्पन्ना एकादशी की कथा में एकादशी देवी के प्रकट होने का प्रसंग है, तो निर्जला एकादशी की कथा भीमसेन से जुड़ी है। हर एकादशी की विस्तृत व्रत कथा उसके अलग पृष्ठ पर पढ़ें — नीचे प्रमुख एकादशियों के लिंक दिए गए हैं।

सभी प्रमुख एकादशी की कथाएँ →

मंत्र

भगवान विष्णु मंत्र

सभी मंत्र →
🕉️ मंत्र
Hare Krishna Mahamantra
पूरा मंत्र पढ़ें →
शुभकामनाएँ

एकादशी शुभकामना संदेश

सभी संदेश →
💐 संदेश

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार | Premchand Quotes – Quotes of Premchand – हिन्दी में मोटिवेशनल वचन

सभी संदेश देखें →
💐 संदेश

शिव नामावली 108 | भगवान शिव के 108 नाम (अर्थ सहित) | Shiv Namavali With Meaning & Jaap

सभी संदेश देखें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

एकादशी की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?

पंचांग-सत्यापित
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
अयनांशलाहिड़ी (चित्रपक्ष)
तिथि का आधारसूर्योदयकालीन तिथि
सूची में तिथियाँ24
आराध्य देवभगवान विष्णु
अंतिम संशोधन24 अगस्त 2026

प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली एकादशी अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 को है। स्थान के अनुसार तिथि में अंतर संभव है।
सामान्यतः वर्ष में 24 एकादशी होती हैं — प्रत्येक माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एक-एक। अधिक मास (मलमास) होने पर संख्या 26 हो जाती है। पूरी सूची ऊपर कैलेंडर में दी गई है।
एकादशी भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, विष्णु पूजा और नामस्मरण से पापों का क्षय होता है, मन संयमित रहता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
फलाहार — फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और मेवे लिए जा सकते हैं। निर्जला व्रत रखने वाले जल भी ग्रहण नहीं करते। पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपनाएं।
शास्त्रीय मान्यता है कि एकादशी के दिन अन्न — विशेषकर चावल — का सेवन वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन चावल में सूक्ष्म जीव-दोष माना गया है; व्रती और परिवारजन दोनों इससे परहेज़ करते हैं।
पारण द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले किया जाता है। हरि वासर की अवधि में पारण वर्जित है। सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है — स्थानीय पंचांग देखें।
हर हिन्दू मास में दो एकादशी आती हैं — कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के बाद) और शुक्ल पक्ष (अमावस्या के बाद)। दोनों के नाम, कथा और फल अलग-अलग हैं, पर व्रत विधि लगभग समान रहती है।
निर्जला एकादशी में जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। मान्यता है कि केवल इस एक व्रत के पालन से वर्ष की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है — इसीलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।
हाँ। तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर शहर में अलग है। इसीलिए कभी-कभी दो निकटवर्ती शहरों में व्रत की तारीख़ एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
हाँ। रोगी, वृद्ध, गर्भवती स्त्रियाँ और बच्चे व्रत के बिना भी विष्णु पूजा, विष्णु सहस्रनाम या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप कर पूर्ण श्रद्धा से एकादशी मना सकते हैं। भाव ही प्रधान है।
तुलसी भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं और एकादशी पर तुलसी माता भी व्रत रखती हैं — ऐसी मान्यता है। इसलिए इस दिन तुलसी दल तोड़ना वर्जित है; पूजा के लिए दशमी को ही तुलसी पत्र तोड़कर रख लें।

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