एकादशी 2026–2027: तिथि, कैलेंडर, व्रत विधि और पारण
एकादशी 2026–2027 की पूरी तिथि सूची — अगली एकादशी कब है, शुक्ल/कृष्ण पक्ष, व्रत विधि, पारण नियम, क्या खाएं और व्रत कथा। पंचांग-आधारित प्रामाणिक जानकारी।
एकादशी कब है? — संक्षिप्त उत्तर
अगली एकादशी — अजा एकादशी, 7 सितंबर 2026 (सोमवार) को है — भाद्रपद, कृष्ण एकादशी। व्रत का पारण अगले दिन प्रातः किया जाता है। तिथि प्रारंभ-समाप्ति और सूर्योदय के अनुसार आपके शहर में तारीख़ में अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
❝एकादश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोः अपि — दोनों पक्षों की एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।
— ब्रह्म-वैवर्त पुराण
इस महीने की एकादशी कब है?
इस महीने एकादशी की कोई तिथि नहीं है। आगामी एकादशी: अजा एकादशी — 7 सितंबर 2026 (सोमवार)।
हर महीने एकादशी कब है?
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 18 जनवरी 2027 | सोमवार | पौष, शुक्ल एकादशी | पौष पुत्रदा एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 2 फरवरी 2027 | मंगलवार | माघ, कृष्ण एकादशी | षटतिला एकादशी |
| 17 फरवरी 2027 | बुधवार | माघ, शुक्ल एकादशी | जया एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | फाल्गुन, कृष्ण एकादशी | विजया एकादशी |
| 18 मार्च 2027 | गुरुवार | फाल्गुन, शुक्ल एकादशी | रंगभरनी / आमलकी एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 2 अप्रैल 2027 | शुक्रवार | चैत्र, कृष्ण एकादशी | पापमोचिनी एकादशी |
| 2 अप्रैल 2027 | रविवार | चैत्र, कृष्ण एकादशी | वैष्णव पापमोचिनी एकादशी |
| 17 अप्रैल 2027 | शनिवार | चैत्र, शुक्ल एकादशी | कामदा एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 2 मई 2027 | रविवार | वैसाख, कृष्ण एकादशी | वरूथिनी एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 1 जून 2027 | मंगलवार | ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी | अपरा एकादशी |
| 14 जून 2027 | सोमवार | ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी | निर्जला एकादशी |
| 29 जून 2027 | शुक्रवार | आषाढ़, कृष्ण एकादशी | योगिनी एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 1 जुलाई 2027 | रविवार | आषाढ़, कृष्ण एकादशी | वैष्णव योगिनी एकादशी |
| 30 जुलाई 2027 | रविवार | श्रावण, कृष्ण एकादशी | कामिका एकादशी |
| 30 जुलाई 2027 | सोमवार | श्रावण, कृष्ण एकादशी | कामिका एकादशी व्रत |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 12 अगस्त 2027 | शनिवार | आषाढ़, शुक्ल एकादशी | देवशयनी एकादशी |
| 12 अगस्त 2027 | मंगलवार | श्रावण, शुक्ल एकादशी | श्रावण पुत्रदा एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | भाद्रपद, कृष्ण एकादशी | अजा एकादशी |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | भाद्रपद, शुक्ल एकादशी | परिवर्तिनी एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | आश्विन, कृष्ण एकादशी | इन्दिरा एकादशी |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | आश्विन, शुक्ल एकादशी | पापांकुशा एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | कार्तिक, कृष्ण एकादशी | रमा एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी | उत्पन्ना एकादशी व्रत |
| 23 दिसंबर 2027 | गुरुवार | पौष, कृष्ण एकादशी | सफला एकादशी |
| तारीख | दिन | तिथि / पक्ष | नाम | पारण | |
|---|---|---|---|---|---|
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | भाद्रपद, कृष्ण एकादशी | अजा एकादशी | 8 सितंबर, प्रातः* | देखें |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | भाद्रपद, शुक्ल एकादशी | परिवर्तिनी एकादशी | 23 सितंबर, प्रातः* | देखें |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | आश्विन, कृष्ण एकादशी | इन्दिरा एकादशी | 7 अक्टूबर, प्रातः* | देखें |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | आश्विन, शुक्ल एकादशी | पापांकुशा एकादशी | 23 अक्टूबर, प्रातः* | देखें |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | कार्तिक, कृष्ण एकादशी | रमा एकादशी | 6 नवंबर, प्रातः* | देखें |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी | उत्पन्ना एकादशी व्रत | 5 दिसंबर, प्रातः* | देखें |
| 18 जनवरी 2027 | सोमवार | पौष, शुक्ल एकादशी | पौष पुत्रदा एकादशी | 19 जनवरी, प्रातः* | देखें |
| 2 फरवरी 2027 | मंगलवार | माघ, कृष्ण एकादशी | षटतिला एकादशी | 3 फरवरी, प्रातः* | देखें |
| 17 फरवरी 2027 | बुधवार | माघ, शुक्ल एकादशी | जया एकादशी | 18 फरवरी, प्रातः* | देखें |
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | फाल्गुन, कृष्ण एकादशी | विजया एकादशी | 5 मार्च, प्रातः* | देखें |
| 18 मार्च 2027 | गुरुवार | फाल्गुन, शुक्ल एकादशी | रंगभरनी / आमलकी एकादशी | 19 मार्च, प्रातः* | देखें |
| 2 अप्रैल 2027 | शुक्रवार | चैत्र, कृष्ण एकादशी | पापमोचिनी एकादशी | 3 अप्रैल, प्रातः* | देखें |
| 2 अप्रैल 2027 | रविवार | चैत्र, कृष्ण एकादशी | वैष्णव पापमोचिनी एकादशी | 19 अप्रैल, प्रातः* | देखें |
| 17 अप्रैल 2027 | शनिवार | चैत्र, शुक्ल एकादशी | कामदा एकादशी | 18 अप्रैल, प्रातः* | देखें |
| 2 मई 2027 | रविवार | वैसाख, कृष्ण एकादशी | वरूथिनी एकादशी | 3 मई, प्रातः* | देखें |
| 1 जून 2027 | मंगलवार | ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी | अपरा एकादशी | 2 जून, प्रातः* | देखें |
| 14 जून 2027 | सोमवार | ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी | निर्जला एकादशी | 15 जून, प्रातः* | देखें |
| 29 जून 2027 | शुक्रवार | आषाढ़, कृष्ण एकादशी | योगिनी एकादशी | 18 जून, प्रातः* | देखें |
| 1 जुलाई 2027 | रविवार | आषाढ़, कृष्ण एकादशी | वैष्णव योगिनी एकादशी | 9 जुलाई, प्रातः* | देखें |
| 30 जुलाई 2027 | रविवार | श्रावण, कृष्ण एकादशी | कामिका एकादशी | 19 जुलाई, प्रातः* | देखें |
| 30 जुलाई 2027 | सोमवार | श्रावण, कृष्ण एकादशी | कामिका एकादशी व्रत | 7 अगस्त, प्रातः* | देखें |
| 12 अगस्त 2027 | शनिवार | आषाढ़, शुक्ल एकादशी | देवशयनी एकादशी | 29 अगस्त, प्रातः* | देखें |
| 12 अगस्त 2027 | मंगलवार | श्रावण, शुक्ल एकादशी | श्रावण पुत्रदा एकादशी | 19 अगस्त, प्रातः* | देखें |
| 23 दिसंबर 2027 | गुरुवार | पौष, कृष्ण एकादशी | सफला एकादशी | 24 दिसंबर, प्रातः* | देखें |
* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।
एकादशी आरंभ और समाप्ति
| तारीख | दिन | तिथि आरंभ → समाप्ति |
|---|---|---|
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | 7 सितंबर 12:59 AM → 7 सितंबर 10:33 PM |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | 22 सितंबर 1:30 AM → 23 सितंबर 3:13 AM |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | 6 अक्टूबर 7:37 AM → 7 अक्टूबर 6:04 AM |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | 21 अक्टूबर 7:41 PM → 22 अक्टूबर 8:17 PM |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | 4 नवंबर 4:33 PM → 5 नवंबर 4:05 PM |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | 4 दिसंबर 4:33 AM → 5 दिसंबर 5:14 AM |
| 18 जनवरी 2027 | सोमवार | 18 जनवरी 3:56 PM → 19 जनवरी 1:19 PM |
| 2 फरवरी 2027 | मंगलवार | 1 फरवरी 2:11 PM → 2 फरवरी 4:40 PM |
| 17 फरवरी 2027 | बुधवार | 17 फरवरी 1:49 AM → 17 फरवरी 11:01 PM |
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | 3 मार्च 10:14 AM → 4 मार्च 12:54 PM |
| 18 मार्च 2027 | गुरुवार | 18 मार्च 9:51 AM → 19 मार्च 7:21 AM |
| 2 अप्रैल 2027 | शुक्रवार | 2 अप्रैल 6:15 AM → 3 अप्रैल 8:21 AM |
| 2 अप्रैल 2027 | रविवार | 18 अप्रैल 1:40 PM → 19 अप्रैल 2:46 PM |
| 17 अप्रैल 2027 | शनिवार | 16 अप्रैल 4:51 PM → 17 अप्रैल 2:57 PM |
| 2 मई 2027 | रविवार | 2 मई 12:23 AM → 3 मई 1:21 AM |
| 1 जून 2027 | मंगलवार | 31 मई 3:32 PM → 1 जून 3:09 PM |
| 14 जून 2027 | सोमवार | 14 जून 7:41 AM → 15 जून 7:37 AM |
| 29 जून 2027 | शुक्रवार | 17 जून 1:46 PM → 18 जून 10:52 AM |
| 1 जुलाई 2027 | रविवार | 8 जुलाई 12:48 PM → 9 जुलाई 9:55 AM |
| 30 जुलाई 2027 | रविवार | 18 जुलाई 7:29 PM → 19 जुलाई 4:34 PM |
| 30 जुलाई 2027 | सोमवार | 6 अगस्त 5:42 PM → 7 अगस्त 3:05 PM |
| 12 अगस्त 2027 | शनिवार | 28 अगस्त 2:42 PM → 29 अगस्त 5:04 PM |
| 12 अगस्त 2027 | मंगलवार | 17 अगस्त 10:57 AM → 19 अगस्त 6:40 PM |
| 23 दिसंबर 2027 | गुरुवार | 23 दिसंबर 5:10 AM → 24 दिसंबर 4:41 AM |
एकादशी क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
सनातन धर्म में एकादशी तिथि (ग्यारस) प्रत्येक मास में दो बार — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में — आती है। एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष नाम और महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।
एकादशी वीडियो
एकादशी को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?
| क्षेत्र / परंपरा | नाम |
|---|---|
| गुजरात | अग्यारस |
| बंगाल | एकादोशी |
| महाराष्ट्र | एकादशी |
| दक्षिण भारत | एकादशी (Ekadasi) |
| उत्तर भारत | ग्यारस |
एकादशी व्रत विधि और नियम
एकादशी (Ekadashi) व्रत कैसे प्रारंभ हुआ? भगवती एकादशी कौन है, इस संबंध में पद्म पुराण में कथा है कि एक बार पुण्यश्लोक धर्मराज युधिष्ठिर को लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त दुःखों, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाने, हजारों यज्ञों के अनुष्ठान की तुलना करने वाले, चारों पुरुषार्थों को सहज ही देने वाले एकादशी व्रत करने का निर्देश दिया।
एकादशी (Ekadashi) व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
ये हैं एकादशी व्रत-उपवास के नियम... * दशमी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। * रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। * एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। * यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें या पुरोहितजी से गीता पाठ का श्रवण करें। * फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि 'आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूंगा।' * तत्पश्चात 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस द्वादश मंत्र का जाप करें। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम को कंठ का भूषण बनाएं। * भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करें और कहे कि- हे त्रिलोकीनाथ! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति प्रदान करना। * यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा मांग लेना चाहिए। * एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं। * इस दिन यथाशक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें। * एकादशी (ग्यारस) के दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। * केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें। * प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए। * द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए। * क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैंएकादशी पारण समय और नियम
- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद किया जाता है — द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण कर लेना आवश्यक माना गया है।
- हरि वासर (द्वादशी की प्रथम एक-चौथाई अवधि) में पारण वर्जित माना जाता है; इसके समाप्त होने की प्रतीक्षा करें।
- पारण का शुभ मुहूर्त हर शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए अपने स्थान का पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि करें।
- यदि द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो, तो पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है।
- पारण सामान्यतः तुलसी-जल या सात्विक अन्न से किया जाता है।
एकादशी व्रत में क्या करें क्या ना करें?
✅ क्या करें
- प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करें
- दिनभर सात्विक भाव एवं ब्रह्मचर्य का पालन करें
- विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें
- द्वादशी को पारण समय पर व्रत खोलें
- जरूरतमंदों को अन्न एवं जल का दान करें
⛔ क्या ना करें
- चावल एवं अन्न का सेवन न करें
- क्रोध, झूठ एवं निंदा से बचें
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) न लें
- दिन में शयन न करें
- पारण समय बीतने के बाद व्रत न खोलें
नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।
प्रमुख एकादशी और उनका महत्व
निर्जला एकादशी
वर्ष की सबसे कठोर एकादशी — निर्जल व्रत, सभी एकादशियों का फल
विवरण देखें →देवशयनी एकादशी
भगवान विष्णु के शयन का आरंभ — चातुर्मास प्रारंभ
विवरण देखें →देवउठनी एकादशी
देव जागरण — तुलसी विवाह और मांगलिक कार्यों का आरंभ
विवरण देखें →मोक्षदा एकादशी
गीता जयंती से जुड़ी — मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी
विवरण देखें →उत्पन्ना एकादशी
एकादशी देवी के प्राकट्य की तिथि — व्रत आरंभ के लिए श्रेष्ठ
विवरण देखें →योगिनी एकादशी
पाप-नाश और आरोग्य के लिए फलदायी
विवरण देखें →पुत्रदा एकादशी
संतान सुख की कामना के लिए — वर्ष में दो बार
विवरण देखें →कामदा एकादशी
चैत्र शुक्ल — मनोकामना पूर्ण करने वाली एकादशी
विवरण देखें →एकादशी व्रत कथा
शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि स्वयं भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है — पद्म पुराण में प्रत्येक एकादशी की अपनी कथा और महिमा वर्णित है। उत्पन्ना एकादशी की कथा में एकादशी देवी के प्रकट होने का प्रसंग है, तो निर्जला एकादशी की कथा भीमसेन से जुड़ी है। हर एकादशी की विस्तृत व्रत कथा उसके अलग पृष्ठ पर पढ़ें — नीचे प्रमुख एकादशियों के लिंक दिए गए हैं।
भगवान विष्णु मंत्र
एकादशी से जुड़े तथ्य
केरल के शरण गुरुवयूर नें भगवान श्री कृष्ण की 60 फीट ऊँची और 34 फीट चौड़ी यह चित्रकला 100 दिनों में बनायी है। शरण गुरुवयूर अभी भी इस…
०२श्मशानों के द्वारपाल शिव जी के अवतार भैरव होते हैं, काशी के द्वारपाल काल भैरव हैं, इसी प्रकार उज्जैन के द्वारपाल बटुक भैरव हैं। का…
०३सुश्रुत संहिता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि ने भगवान विष्णु के निर्देश पर काशी नरेश धन्वराज के घर पुत्र रूप में जन्म लिया, जिन्हें ‘ध…
एकादशी शुभकामना संदेश
मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार | Premchand Quotes – Quotes of Premchand – हिन्दी में मोटिवेशनल वचन
सभी संदेश देखें →शिव नामावली 108 | भगवान शिव के 108 नाम (अर्थ सहित) | Shiv Namavali With Meaning & Jaap
सभी संदेश देखें →मंत्र, कथा और देवता
एकादशी की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?
प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →
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