ज्येष्ठ माह वर्ष के सबसे गर्म समय में आता है। इसलिए धार्मिक परंपराओं में इस महीने जलदान, प्यासे लोगों को पानी पिलाने और पशु-पक्षियों के लिए जल रखने को विशेष पुण्य का कार्य माना गया है।
ज्येष्ठ अमावस्या पर उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं तथा वट वृक्ष की पूजा करती हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में यही परंपरा ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में निभाई जाती है।
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह तिथि माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से जुड़ी है। इसके अगले दिन आने वाली निर्जला एकादशी भगवान विष्णु की उपासना, आत्मसंयम और दान के लिए विशेष मानी जाती है।
इस माह में पूजा-पाठ के साथ जल की बचत, नदी-तालाबों की स्वच्छता और जरूरतमंदों की सेवा करना भी पर्वों की भावना को सार्थक बनाता है।