विनायक चतुर्थी 2026–2027: तिथि, पूजा विधि और व्रत नियम
विनायक चतुर्थी 2026–2027 की तिथियाँ, मध्याह्न पूजा समय, व्रत विधि, पारण नियम, कथा और गणेश जी को अर्पित किए जाने वाले भोग की जानकारी पढ़ें।
विनायक चतुर्थी कब है? — संक्षिप्त उत्तर
विनायक चतुर्थी प्रत्येक हिंदू मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन मध्याह्न में गणेश पूजन, मंत्र-जप और व्रत कथा की परंपरा है। चतुर्थी तिथि और पूजा का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।
❝त्वं कर्ता त्वं धर्ता त्वं हर्तासि। त्वं सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि॥
— श्री गणपति अथर्वशीर्ष
इस महीने की विनायक चतुर्थी कब है?
इस महीने विनायक चतुर्थी की कोई तिथि नहीं है। आगामी विनायक चतुर्थी: कार्तिक विनायक चतुर्थी — 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)।
हर महीने विनायक चतुर्थी कब है?
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 10 फरवरी 2027 | बुधवार | पौष, शुक्ल चतुर्थी | माघ गणेश चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 12 मार्च 2027 | शुक्रवार | माघ, शुक्ल चतुर्थी | फाल्गुन विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 10 अप्रैल 2027 | शनिवार | फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी | चैत्र विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 9 मई 2027 | रविवार | चैत्र, शुक्ल तृतीया | वैसाख विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 8 जून 2027 | मंगलवार | वैशाख, शुक्ल चतुर्थी | ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 13 नवंबर 2026 | शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल चतुर्थी | कार्तिक विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि | नाम |
|---|---|---|---|
| 13 दिसंबर 2026 | रविवार | कार्तिक, शुक्ल चतुर्थी | मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी |
| तारीख | दिन | तिथि / पक्ष | नाम | पारण | |
|---|---|---|---|---|---|
| 13 नवंबर 2026 | शुक्रवार | आश्विन, शुक्ल चतुर्थी | कार्तिक विनायक चतुर्थी | 14 नवंबर, प्रातः* | देखें |
| 13 दिसंबर 2026 | रविवार | कार्तिक, शुक्ल चतुर्थी | मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी | 14 दिसंबर, प्रातः* | देखें |
| 10 फरवरी 2027 | बुधवार | पौष, शुक्ल चतुर्थी | माघ गणेश चतुर्थी | 11 फरवरी, प्रातः* | देखें |
| 12 मार्च 2027 | शुक्रवार | माघ, शुक्ल चतुर्थी | फाल्गुन विनायक चतुर्थी | 13 मार्च, प्रातः* | देखें |
| 10 अप्रैल 2027 | शनिवार | फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी | चैत्र विनायक चतुर्थी | 11 अप्रैल, प्रातः* | देखें |
| 9 मई 2027 | रविवार | चैत्र, शुक्ल तृतीया | वैसाख विनायक चतुर्थी | 10 मई, प्रातः* | देखें |
| 8 जून 2027 | मंगलवार | वैशाख, शुक्ल चतुर्थी | ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी | 9 जून, प्रातः* | देखें |
* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।
विनायक चतुर्थी आरंभ और समाप्ति
| तारीख | दिन | तिथि आरंभ → समाप्ति |
|---|---|---|
| 13 नवंबर 2026 | शुक्रवार | 12 नवंबर 11:39 PM → 14 नवंबर 2:12 AM |
| 13 दिसंबर 2026 | रविवार | 12 दिसंबर 7:36 PM → 13 दिसंबर 10:17 PM |
| 10 फरवरी 2027 | बुधवार | 10 फरवरी 7:49 AM → 11 फरवरी 8:34 AM |
| 12 मार्च 2027 | शुक्रवार | 11 मार्च 9:07 PM → 12 मार्च 8:27 PM |
| 10 अप्रैल 2027 | शनिवार | 10 अप्रैल 7:01 AM → 11 अप्रैल 5:09 AM |
| 9 मई 2027 | रविवार | 9 मई 2:33 PM → 10 मई 11:52 AM |
| 8 जून 2027 | मंगलवार | 7 जून 8:55 PM → 8 जून 5:51 PM |
विनायक चतुर्थी क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित मासिक व्रत है। यह प्रत्येक हिंदू मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस दिन उनकी पूजा करके जीवन की बाधाओं को दूर करने, शुभ कार्यों में सफलता और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
विनायक चतुर्थी की पूजा सामान्यतः मध्याह्न काल में की जाती है। व्रती प्रातः स्नान करके संकल्प लेते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार उपवास या फलाहार करते हैं। पूजा में भगवान गणेश को दूर्वा, लाल या पीले फूल, फल, मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। मंत्र-जप, व्रत कथा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी अलग-अलग व्रत हैं। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है, जबकि संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने का नियम नहीं होता। पूजा का सही समय तिथि और स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना चाहिए।
विनायक चतुर्थी को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?
| क्षेत्र / परंपरा | नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | विनायक चतुर्थी |
| महाराष्ट्र | विनायकी चतुर्थी |
| आंध्र प्रदेश | विनायक चविति |
| तेलंगाना | विनायक चविति |
| कर्नाटक | विनायक चतुर्थी |
| तमिलनाडु | पिल्लैयार चतुर्थी |
विनायक चतुर्थी व्रत विधि और नियम
व्रत का संकल्प: विनायक चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान गणेश का ध्यान करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या फलाहार का संकल्प लें। पूजा स्थान को साफ करके एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
मध्याह्न पूजा: विनायक चतुर्थी की मुख्य पूजा मध्याह्न काल में की जाती है। सही मध्याह्न पूजा समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखें। दीप और धूप जलाकर गणेश जी को रोली, अक्षत, चंदन, फूल तथा दूर्वा अर्पित करें।
भोग और मंत्र: भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, गुड़, फल या नारियल का भोग लगाएँ। इसके बाद ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप करें। गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा या किसी प्रचलित गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
कथा और आरती: पूजा के दौरान विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और परिवार के सुख, स्वास्थ्य तथा कार्यों में सफलता की प्रार्थना करें।
व्रत में आहार: फलाहार करने वाले लोग फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, आलू और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बना भोजन ले सकते हैं। सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है। भोजन के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
चंद्र दर्शन: धार्मिक परंपरा में विनायक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता है। यह नियम विशेष रूप से भाद्रपद गणेश चतुर्थी से जुड़ा है। अन्य मासिक चतुर्थियों में अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा का पालन करें।
व्रत का समापन: पूजा और आरती पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करें। कुछ परिवार मध्याह्न पूजा के बाद और कुछ सूर्यास्त के बाद व्रत खोलते हैं। विनायक चतुर्थी के लिए अगले दिन द्वादशी पारण का नियम नहीं होता।
स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और नियमित दवा लेने वाले लोग कठोर या निर्जल व्रत न रखें। वे फलाहार या सामान्य सात्विक भोजन के साथ पूजा कर सकते हैं।
विनायक चतुर्थी पारण समय और नियम
- विनायक चतुर्थी की पूजा मध्याह्न काल में करना श्रेष्ठ माना जाता है
- भगवान गणेश की पूजा और आरती पूरी करने के बाद ही व्रत खोलें
- कुछ परंपराओं में सूर्यास्त के बाद फलाहार या भोजन से पारण किया जाता है
- चतुर्थी तिथि अगले दिन तक रहने पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार पारण करें
- पारण से पहले भगवान गणेश को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें
- इस व्रत के लिए अगले दिन द्वादशी में पारण करने का नियम लागू नहीं होता
- पूजा और पारण का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखें
- स्वास्थ्य ठीक न होने पर कठोर या निर्जल उपवास न रखें
विनायक चतुर्थी व्रत में क्या करें क्या ना करें?
✅ क्या करें
- प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें
- पूजा स्थान को साफ और व्यवस्थित रखें
- मध्याह्न पूजा का सही समय स्थानीय पंचांग में देखें
- भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, फल और मोदक अर्पित करें
- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें
- गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करें
- विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें
- पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती करें
- अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या फलाहार करें
- भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण करें
- जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या यथाशक्ति दान दें
- अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखें
⛔ क्या ना करें
- स्वास्थ्य ठीक न होने पर जबरन निर्जल उपवास न रखें
- पूजा किए बिना जल्दबाजी में व्रत न खोलें
- मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन का सेवन न करें
- पूजा के दौरान क्रोध, झूठ और कटु वचन से बचें
- भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित न करें
- पूजा सामग्री और प्रसाद का अनादर न करें
- व्रत के नियमों को लेकर किसी दूसरे व्यक्ति पर दबाव न डालें
- चंद्र दर्शन की परंपरा को संकष्टी चतुर्थी के नियम से न मिलाएं
- विनायक चतुर्थी में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत न खोलें
- अगले दिन द्वादशी पारण वाला नियम लागू न करें
- बच्चों, बुजुर्गों या बीमार व्यक्तियों पर कठोर व्रत न थोपें
- अपने शहर की जगह किसी दूसरे स्थान का पूजा समय न अपनाएं
नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।
प्रमुख विनायक चतुर्थी और उनका महत्व
आश्विन विनायक चतुर्थी
आश्विन मास की शुक्ल चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है
विवरण देखें →माघ गणेश चतुर्थी
माघ शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती, तिलकुंद चतुर्थी और वरद चतुर्थी के रूप में भी मनाया जाता है
विवरण देखें →फाल्गुन विनायक चतुर्थी
फाल्गुन मास की इस चतुर्थी पर सुख, बुद्धि और कार्यों की सफलता के लिए गणेश पूजन किया जाता है
विवरण देखें →चैत्र विनायक चतुर्थी
चैत्र शुक्ल चतुर्थी पर नए कार्यों में सफलता और विघ्नों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है
विवरण देखें →वैशाख विनायक चतुर्थी
वैशाख मास की विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की मासिक आराधना का पवित्र अवसर है
विवरण देखें →ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी
ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी पर उपवास और गणेश पूजन करने की परंपरा है
विवरण देखें →विनायक चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उस समय भगवान शिव कैलाश पर उपस्थित नहीं थे। माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक सुंदर बालक बनाया और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने बालक को अपना पुत्र मानकर द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया और कहा कि उनकी अनुमति के बिना किसी को भीतर न आने दिया जाए। कुछ समय बाद भगवान शिव वहाँ पहुँचे और अंदर जाने लगे। बालक उन्हें पहचानता नहीं था, इसलिए उसने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को रोक दिया। भगवान शिव ने समझाया कि वे इस स्थान के स्वामी और माता पार्वती के पति हैं, लेकिन बालक अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा। भगवान शिव के गणों ने भी उसे द्वार से हटाने का प्रयास किया, परंतु वह बड़ी वीरता से उनका सामना करता रहा। अंततः भगवान शिव और बालक के बीच युद्ध हुआ। क्रोध में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का मस्तक काट दिया। जब माता पार्वती बाहर आईं और उन्होंने अपने पुत्र को मृत देखा, तो वे शोक और क्रोध से भर गईं। उन्होंने समस्त सृष्टि के विनाश की चेतावनी दी। देवताओं ने भगवान शिव से बालक को दोबारा जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा की ओर जाएँ और जो पहला जीव मिले, उसका मस्तक लेकर आएँ। गणों को सबसे पहले एक हाथी मिला। वे उसका मस्तक लेकर लौटे और भगवान शिव ने उसे बालक के शरीर पर स्थापित कर दिया। इस प्रकार बालक को नया जीवन प्राप्त हुआ। भगवान शिव ने बालक को अपना पुत्र स्वीकार किया और उसका नाम गणेश रखा। उन्होंने उसे अपने समस्त गणों का अधिपति बनाया। सभी देवताओं ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया। भगवान शिव ने यह वरदान भी दिया कि किसी पूजा, यज्ञ या शुभ कार्य के आरंभ में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी। उनकी पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य पूर्ण नहीं माना जाएगा। इसी कारण भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। विनायक चतुर्थी पर श्रद्धालु उनकी पूजा करके जीवन की बाधाओं को दूर करने, बुद्धि और विवेक प्राप्त करने तथा कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं। यह कथा कर्तव्य, माता-पिता के प्रति निष्ठा और अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है। बालक गणेश ने कठिन परिस्थिति में भी माता की आज्ञा का पालन किया। वहीं उनका पुनर्जन्म यह संदेश देता है कि संकट के बाद भी जीवन में नई शुरुआत और मंगल का मार्ग खुल सकता है।
भगवान गणेश मंत्र
विनायक चतुर्थी से जुड़े तथ्य
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विनायक चतुर्थी शुभकामना संदेश
मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार | Premchand Quotes – Quotes of Premchand – हिन्दी में मोटिवेशनल वचन
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विनायक चतुर्थी की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?
प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →
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