कार्तिक मास का आगमन हल्की गुलाबी ठंडक, धान‑कटाई की सुगंध और दीपपर्व की तैयारियों का संकेत देता है। इसी माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा जाता है, जिसमें सुहागिनें पति की दीर्घ आयु और वैवाहिक सौभाग्य के लिए उपासना करती हैं। व्रती स्त्रियाँ सोलह श्रृंगार से सजकर शिव‑परिवार—भगवान शिव, माँ पार्वती, श्री गणेश, कुमार कार्तिकेय तथा नंदी—का पूजन करती हैं। चंद्रमा को आयु, सुख और शांति का अधिष्ठाता माना गया है; चंद्रोदय पर अर्घ्य देने से दाम्पत्य‑जीवन में सौहार्द और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कार्तिक के पुण्य‑काल में यह व्रत आस्था, अनुराग और ऋतु‑परिवर्तन, तीनों का अद्भुत संगम रचता है, जो पारम्परिक परिवारों को कर्तव्य‑बोध और भावनात्मक निकटता का स्पष्ट संदेश देता है।