कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिख समुदाय के लिए प्रकाश पर्व है, क्योंकि इसी तिथि पर प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी का अवतरण हुआ। जन्म-स्थली राय भोई की तलवंडी, आज का ननकाना साहिब, पंजाब (पाकिस्तान), से निकली प्रकाश-धारा ने ‘‘एक-ओंकार’’ और ‘‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’’ का संदेश संपूर्ण मानवता तक पहुँचाया। गुरुपर्व पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ के साथ गुरुवाणी का मधुर कीर्तन होता है; संगत सेवा-भाव से लंगर तैयार करती है, और दीयों-रंगोलियों से आलोकित परिसर में निश्चल श्रद्धा का प्रवाह उमड़ पड़ता है। गुरु ग्रंथ साहिब के 1430 पन्नों में गुरु-उपदेशों के साथ 30 संत-कवियों की वाणियाँ संकलित हैं, जो जाति-धर्म से परे प्रेम, समरसता और उदार सेवा का मार्ग प्रशस्त करती हैं।