कार्तिक-मास की कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को यम-दीपम का पुण्य क्षण आता है। इस दिन मृत्यु-देव यमराज के नाम पर दीपदान करने से पारिवारिक जन अकाल-मृत्यु और असमय कष्टों से सुरक्षित रहते हैं। परम्परा है कि सूर्यास्त के बाद, जब घर के सभी सदस्य एकत्र हों, आँगन अथवा मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर तिल या घी का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाए। दीपक में तेल, रुई की बत्ती, थोड़े चावल और काली तिल अवश्य रखें—मान्यता है कि यमराज इस समर्पण से प्रसन्न होकर दीर्घ आयु, उत्तम स्वास्थ्य और भय-निवारण का वर देते हैं। यदि घर की गृहलक्ष्मी स्वयं दीपदान करे, तो दैवी कृपा और पारिवारिक सौहार्द दोनो ही कई गुना बढ़ जाते हैं, और दीपावली-पूर्व वातावरण आध्यात्मिक उजास से भर उठता है।