कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाने वाली स्कन्द षष्ठी, जिसे कुमार षष्ठी या संतान षष्ठी भी कहते हैं, शिव-पुत्र भगवान कार्तिकेय के जन्म-दिवस का पावन उत्सव है। इस दिन शिव-पार्वती के साथ कुमार स्कन्द की स्वर्णिम प्रतिमा स्थापित कर अखंड दीप जलाए जाते हैं; दुर्वा, केसर-दूध, केतकी-पुष्प और लाल चन्दन से अभिषेक किया जाता है। स्कन्दपुराण के नारद-नारायण संवाद में व्रत की महिमा विस्तार से वर्णित है—कहते हैं, इससे संतान-सुख, शौर्य और रोग-निवारण का वर मिलता है। ज्योतिष के अनुसार षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह पर कार्तिकेय का आधिपत्य है; जिनकी कुण्डली में कर्क-स्थ मंगल अशुभ फल दे रहा हो, वे आज व्रत रखकर दक्षिणाभिमुख दीप-दान करें, तो मंगल बलवान होता है और जीवन में साहस, विजय व सम्पन्नता बढ़ती है।