श्रावण हिन्दू पंचांग का पाँचवाँ महीना है और आम बोलचाल में इसे सावन कहा जाता है। वर्षा ऋतु के बीच आने वाला यह महीना मुख्य रूप से भगवान शिव की आराधना से जुड़ा है। शिव मंदिरों में पूरे महीने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र-जप और विशेष पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसलिए सावन में उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। सावन के सोमवार को भगवान शिव और मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है।
श्रावण में हरियाली तीज प्रकृति, वर्षा और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ी है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है और रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का उत्सव है। श्रावणी पूर्णिमा पर कई समुदायों में धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञोपवीत परिवर्तन और अध्ययन की नई शुरुआत से जुड़ी परंपराएँ भी निभाई जाती हैं।