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परिहार: दर्पण देखकर या दूध पीकर यात्रा करें।
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श्मशानों के द्वारपाल शिव जी के अवतार भैरव होते हैं, काशी के द्वारपाल काल भैरव हैं, इसी प्रकार उज्जैन के द्वारपाल बटुक भैरव हैं। काशी के दक्षिण ओर स्थित राजा हरिश्चंद्र घाट में शिव जी, मसान रूप में पूजे जाते हैं, जो सर्वाधिक भयंकर रूप वाले तथा श्मशान के स्वामी हैं।
शिव जी तथा माँ पार्वती श्मशान में निवास करते हैं, उनके निवास स्थल कैलाश पर्वत को भी एक दिव्य श्मशान ही माना गया है। इसके अलावा काशी या वाराणसी, उज्जैन की गिनती भी दिव्य श्मशान स्थलों में की जाती हैं।
भगवान शिव और माँ पार्वती के विवाह के समय भगवान श्री विष्णु नें शिवजी का वर्णन करते हुये कर्पूरगौरम् करुणावतारं मन्त्र का गायन किया था, इस मन्त्र द्वारा मृत्युलोक के देवता और भयंकर स्वरुप वाले भगवान शिव के दिव्य सौम्य स्वरुप का वर्णन किया गया है। इस स्तुति में बताया गया है कि भगवान शिव कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, वह करुणा के अवतार हैं और समस्त संसार के अधिपति हैं, सर्पों का हार धारण करने वाले भगवान शिव और माँ पार्वती भक्तों के ह्रदय में सदैव निवास करते हैं।
केदारनाथ में भगवान शंकर बैल के पीठ की पिंड रूपी आकृति में पूजे जाते हैं, जब भगवान शंकर बैल के रूप में अन्तर्धान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग कल्पेश्वर में जटाओं के रूप में प्रतिष्ठित हैं। शिव जी की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और बाबा केदार में बैल के धड़ के रूप में विराजते हैं, इसलिए इन चार स्थानों सहित केदारनाथ जी को पंचकेदार भी कहा जाता है। दीपावली महापर्व के दूसरे दिन शीत ऋतु में मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं।
श्री केदारनाथ जी के सम्बन्ध में स्कंद पुराण में वर्णन है कि भगवान शंकर, माता पार्वती से कहते हैं - हे प्राणेश्वरी यह क्षेत्र उतना ही प्राचीन है, जितना कि मैं हूं। मैंने इसी स्थान पर सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा के रूप में परब्रह्मत्व को प्राप्त किया, तभी से यह स्थान मेरा चिर-परिचित आवास है। यह केदारखंड मेरा चिरनिवास होने के कारण भूस्वर्ग के समान है। शिव पुराण के अनुसार जो भी मनुष्य केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का दर्शन-पूजन कर यहां का जल पीता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता है।
केदारनाथ में शिव जी रुद्ररूप में निवास करते हैं, इसीलिये इस संपूर्ण क्षेत्र को रुद्रप्रयाग कहते हैं। श्री केदारनाथ का मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रप्रयाग नगर में है, मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था। धार्मिक ग्रंथों अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदार ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित है। शिव पुराण के अनुसार मनुष्य यदि बद्रीवन की यात्रा करके नर तथा नारायण और केदारेश्वर शिव के स्वरूप का दर्शन करता है तो, उसे नि:सन्देह मोक्ष प्राप्त होता है।
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