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गोवत्स द्वादशी

5 नवंबर 2026 · गुरुवार आश्विन, कृष्ण एकादशी

कार्तिक माह 2026 में गोवत्स द्वादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

गोवत्स द्वादशी 2026 कब है?

गोवत्स द्वादशी 2026 गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। गोवत्स द्वादशी की तिथि आश्विन, कृष्ण एकादशी है। गोवत्स द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:08 – 08:21 तक रहेगा।

दिनांक5 नवंबर 2026
तिथिआश्विन, कृष्ण एकादशी
पूजा मुहूर्त06:08 – 08:21
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिआश्विन, कृष्ण एकादशीकार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतागौमाता
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनीइन्द्र
संक्षिप्त परिचय

गोवत्स द्वादशी का महत्व और उत्सव

गोवत्स द्वादशी आश्विन, कृष्ण एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन गौमाता की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण एकादशी
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी
योगइन्द्र
करणबालव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

गोवत्स द्वादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:32 – 05:20 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:08 – 08:21 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:19 – 12:03 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:46 – 16:30 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:27 – 17:39 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:04 – 14:28 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 05 Nov 10:35 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:32–05:20
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:08–08:21
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:19 – 12:03
तिथि समाप्त 06 Nov 10:30 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:27–17:39

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

गोवत्स द्वादशी — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक मास की कृष्ण द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहा जाता है; महाराष्ट्र में इसे बछ बारस और गुजरात में वाघ बरस के नाम से भी जानते हैं। यही अनुष्ठान माघ, वैशाख और श्रावण की कृष्ण द्वादशी में भी किया जाता है। भविष्य पुराण वर्णन करता है कि गौमाता के पृष्ठभाग में ब्रह्मा, कंठ में विष्णु, मुख में रुद्र, रोम‑कूपों में महर्षिगण, पूँछ में अनंत नाग, खुरों में समस्त पर्वत, गौ‑मूत्र में गंगा‑आदि नदियाँ तथा गौ‑मय में लक्ष्मी विराजमान हैं; नेत्रों में सूर्य‑चन्द्र की ज्योति विद्यमान है। इसी दिव्यता के प्रतीक स्वरूप माताएँ बछड़े सहित गौ‑पूजन कर संतान की दीर्घ आयु और कुल‑समृद्धि का आशीष माँगती हैं। पारंपरिक मान्यता है कि इस पूजा से परिवार में रोग‑दोष दूर रहते हैं और जीवन में प्रकृति‑सम्मत संतुलन व धन‑धान्य की निरंतरता बनी रहती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

गोवत्स द्वादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिआश्विन, कृष्ण एकादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवगौमाता
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)आश्विन
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन आश्विन माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को है।
गोवत्स द्वादशी आश्विन, कृष्ण एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।