छठ पूजा पूर्वी भारत, ख़ासकर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड, का चार-दिवसीय महापर्व है, जो दीपावली-पंचक के बाद नहाय-खाय से आरम्भ होकर उषा-अर्घ्य पर पूर्ण होता है। श्रद्धालु पहले दिन शुद्ध व्रत-भोजन करते हैं, दूसरे दिन खरना पर गुड़-चावल की खीर का नैवेद्य चढ़ाते हैं, तीसरे दिन डूबते सूर्य को सन्ध्या-अर्घ्य देते हैं और अन्तिम प्रहर में उगते सूर्य को प्रातः-अर्घ्य अर्पित कर व्रत समाप्त करते हैं। मान्यता है कि महाभारत-काल में कुन्ती-पुत्र कर्ण ने सूर्य-आराधना से दिव्य तेज पाया था; तभी से यह साधना जीवित परम्परा है। आधुनिक लोकविश्वास में छठ मैया—षष्ठी देवी—संतान-रक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान देती हैं, जबकि सूर्यदेव शक्ति, सामर्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं।