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आवर्ती व्रत · 2026–2027

संक्रान्ति 2026–2027: सभी 12 संक्रान्तियों की तिथियाँ और पुण्यकाल

संक्रान्ति 2026–2027 की तिथियाँ, सूर्य के राशि-परिवर्तन का समय और पुण्यकाल जानें। स्नान-दान की विधि, सूर्य पूजा, कथा और व्रत से जुड़े नियम पढ़ें।

🗓️

संक्रान्ति कब है? — संक्षिप्त उत्तर

सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, उस समय को संक्रान्ति कहते हैं। एक सौर वर्ष में 12 संक्रान्तियाँ होती हैं। इस अवसर पर स्नान, सूर्योपासना और दान की परंपरा है। संक्रान्ति का क्षण और स्नान-दान का पुण्यकाल अलग हो सकते हैं। अपने स्थान का पंचांग देखें।

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रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्। पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥

— आदित्यहृदय स्तोत्र, श्लोक 6 — वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड
इस महीने — आश्विन मास

इस महीने की संक्रान्ति कब है?

इस महीने संक्रान्ति की कोई तिथि नहीं है। आगामी संक्रान्ति: वृश्चिक संक्रान्ति — 16 नवंबर 2026 (सोमवार)।

🕉️ भगवान सूर्य 📅 वर्ष में 8 तिथियाँ 🪔 व्रत एवं उपवास
महीने अनुसार

हर महीने संक्रान्ति कब है?

तारीखदिनतिथिनाम
15 जनवरी 2027शुक्रवारपौष, शुक्ल सप्तमीमकर संक्रान्ति
तारीखदिनतिथिनाम
13 फरवरी 2027शनिवारपौष, शुक्ल सप्तमीकुम्भ संक्रांति
तारीखदिनतिथिनाम
15 मार्च 2027सोमवारमाघ, शुक्ल सप्तमीमीन संक्रांति
तारीखदिनतिथिनाम
14 अप्रैल 2027बुधवारफाल्गुन, शुक्ल अष्टमीमेष संक्रांति
तारीखदिनतिथिनाम
15 मई 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल दशमीवृषभ संक्रांति
तारीखदिनतिथिनाम
17 जुलाई 2027शनिवारज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्दशीकर्क संक्रान्ति
तारीखदिनतिथिनाम
16 नवंबर 2026सोमवारआश्विन, शुक्ल सप्तमीवृश्चिक संक्रान्ति
तारीखदिनतिथिनाम
16 दिसंबर 2026बुधवारकार्तिक, शुक्ल सप्तमीधनु संक्रान्ति
पूर्ण सूची

संक्रान्ति सूची 2026–2027

तारीखदिनतिथि / पक्षनामपारण
16 नवंबर 2026सोमवारआश्विन, शुक्ल सप्तमीवृश्चिक संक्रान्ति17 नवंबर, प्रातः*देखें
16 दिसंबर 2026बुधवारकार्तिक, शुक्ल सप्तमीधनु संक्रान्ति17 दिसंबर, प्रातः*देखें
15 जनवरी 2027शुक्रवारपौष, शुक्ल सप्तमीमकर संक्रान्ति16 जनवरी, प्रातः*देखें
13 फरवरी 2027शनिवारपौष, शुक्ल सप्तमीकुम्भ संक्रांति 14 फरवरी, प्रातः*देखें
15 मार्च 2027सोमवारमाघ, शुक्ल सप्तमीमीन संक्रांति 16 मार्च, प्रातः*देखें
14 अप्रैल 2027बुधवारफाल्गुन, शुक्ल अष्टमीमेष संक्रांति 15 अप्रैल, प्रातः*देखें
15 मई 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल दशमीवृषभ संक्रांति 16 मई, प्रातः*देखें
17 जुलाई 2027शनिवारज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्दशीकर्क संक्रान्ति18 जुलाई, प्रातः*देखें

* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।

16नवंबर

वृश्चिक संक्रान्ति

सोमवार · आश्विन, शुक्ल सप्तमी

देखें
16दिसंबर

धनु संक्रान्ति

बुधवार · कार्तिक, शुक्ल सप्तमी

देखें
15जनवरी

मकर संक्रान्ति

शुक्रवार · पौष, शुक्ल सप्तमी

देखें
13फरवरी

कुम्भ संक्रांति

शनिवार · पौष, शुक्ल सप्तमी

देखें
15मार्च

मीन संक्रांति

सोमवार · माघ, शुक्ल सप्तमी

देखें
14अप्रैल

मेष संक्रांति

बुधवार · फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी

देखें
15मई

वृषभ संक्रांति

शनिवार · चैत्र, शुक्ल दशमी

देखें
17जुलाई

कर्क संक्रान्ति

शनिवार · ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्दशी

देखें
तिथि समय

संक्रान्ति आरंभ और समाप्ति

तारीखदिनतिथि आरंभ → समाप्ति
16 नवंबर 2026सोमवार16 नवंबर 5:36 PM → 16 नवंबर 10:57 PM
16 दिसंबर 2026बुधवार16 दिसंबर 3:59 PM → 16 दिसंबर 9:30 PM
15 जनवरी 2027शुक्रवार15 जनवरी 12:45 PM → 15 जनवरी 11:16 PM
13 फरवरी 2027शनिवार13 फरवरी 12:31 PM → 13 फरवरी 3:43 PM
15 मार्च 2027सोमवार15 मार्च 12:34 PM → 15 मार्च 6:57 PM
14 अप्रैल 2027बुधवार14 अप्रैल 4:46 PM → 15 अप्रैल 12:16 AM
15 मई 2027शनिवार15 मई 11:01 AM → 15 मई 5:54 PM
17 जुलाई 2027शनिवार17 जुलाई 11:04 AM → 17 जुलाई 11:22 AM
महत्व

संक्रान्ति क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

संक्रान्ति सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश का अवसर है। एक सौर वर्ष में ऐसी 12 संक्रान्तियाँ आती हैं। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करते हैं, उसी के नाम से संक्रान्ति जानी जाती है—जैसे मकर राशि में प्रवेश पर मकर संक्रान्ति और मेष राशि में प्रवेश पर मेष संक्रान्ति। इसका निर्धारण सूर्य की स्थिति से होता है, किसी निश्चित चंद्र तिथि से नहीं।

हमारी परंपरा में संक्रान्ति पर स्नान, सूर्य को अर्घ्य, जप और दान का महत्व है। कहीं इस अवसर पर व्रत रखा जाता है, तो कहीं परिवार के साथ पूजा और अन्नदान किया जाता है। मकर संक्रान्ति पर तिल-गुड़ और खिचड़ी जैसी परंपराएँ भी प्रचलित हैं, लेकिन सभी मासिक संक्रान्तियों की रीति एक जैसी नहीं होती।

संक्रान्ति का क्षण और स्नान-दान का पुण्यकाल अलग हो सकते हैं। इसलिए पूजा की तैयारी करते समय संबंधित संक्रान्ति का स्थानीय पंचांग देखें। इस पेज पर संक्रान्तियों की तिथियों के साथ सूर्योपासना, स्नान-दान, कथा और व्रत के नियमों की जानकारी दी गई है।

क्षेत्रीय नाम

संक्रान्ति को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?

क्षेत्र / परंपरानाम
—संक्रान्ति
—सूर्य संक्रान्ति
व्रत विधि

संक्रान्ति व्रत विधि और नियम

संक्रान्ति पर स्नान, सूर्योपासना और दान की परंपरा है। उपवास और भोजन के नियम क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार बदल सकते हैं। अपने यहाँ चली आ रही विधि का पालन करते हुए संबंधित संक्रान्ति का पुण्यकाल देखें।

स्नान और पूजा की तैयारी

स्वच्छ जल से स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थान को व्यवस्थित करें और भगवान सूर्य का स्मरण करें। तीर्थ जाना संभव न हो तो घर पर ही स्नान और पूजा कर सकते हैं। विशेष संक्रान्ति-स्नान के लिए पंचांग में बताया पुण्यकाल देखें।

सूर्य को अर्घ्य और प्रार्थना

अपनी परंपरा के अनुसार सूर्य को स्वच्छ जल से अर्घ्य दें। “ॐ सूर्याय नमः” का जप कर सकते हैं। समय और सुविधा हो तो आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। पूजा में सूर्य के प्रकाश और उससे मिलने वाले जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।

पुण्यकाल में दान

संबंधित संक्रान्ति के पुण्यकाल में अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान करें। दान की वस्तु चुनते समय पाने वाले की जरूरत का ध्यान रखें। मकर संक्रान्ति पर कई क्षेत्रों में तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान किया जाता है; अन्य संक्रान्तियों में स्थानीय परंपरा का अनुसरण करें।

व्रत और भोजन

व्रत रखने वाले अपनी क्षमता और पारिवारिक विधि के अनुसार संकल्प लें। सभी संक्रान्तियों में निर्जला उपवास या एक जैसा आहार आवश्यक नहीं माना जाता। पूजा और दान के बाद भोजन अथवा पारण अपने संकल्प के अनुसार करें। केवल संक्रान्ति होने के कारण अगले दिन सुबह तक उपवास बढ़ाना जरूरी न समझें।

पारण

संक्रान्ति पारण समय और नियम

  • संक्रान्ति पर उपवास रखा हो तो पारण अपने संकल्प और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
  • स्नान, सूर्य पूजन और दान के लिए संबंधित संक्रान्ति का पुण्यकाल देखें।
  • मकर संक्रान्ति की प्रचलित विधि में स्नान, पूजन और दान के बाद पुण्यकाल में पारण किया जाता है।
  • सभी संक्रान्तियों के लिए अगले दिन सुबह पारण का एक ही नियम लागू न करें।
  • संक्रान्ति का क्षण रात में हो तो उसी समय स्नान या पारण मानकर न चलें। पंचांग में दिया पुण्यकाल देखें।
  • पारण में अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद और सात्त्विक भोजन ग्रहण करें।
⚠️ यहाँ कोई निश्चित घड़ी-समय नहीं दिया गया है — पारण मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और द्वादशी समाप्ति पर निर्भर करता है। कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भोजन एवं आचरण

संक्रान्ति व्रत में क्या करें क्या ना करें?

✅ क्या करें

  • संबंधित संक्रान्ति का क्षण और पुण्यकाल पंचांग में अलग-अलग देखें।
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्रों में सूर्योपासना करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार सूर्य को जल अर्पित करें।
  • कुछ समय सूर्य मंत्र या आदित्यहृदय स्तोत्र के पाठ के लिए निकालें।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या उपयोगी सामग्री दें।
  • क्षेत्रीय रीति और पारिवारिक परंपरा का सम्मान करें।
  • व्रत रखा हो तो संकल्प के अनुसार पारण करें।
  • पूजा और स्नान के स्थान को स्वच्छ रखें।

⛔ क्या ना करें

  • संक्रान्ति को किसी निश्चित चंद्र तिथि से जोड़कर न देखें।
  • संक्रान्ति के क्षण और पुण्यकाल को एक ही समय न मानें।
  • हर संक्रान्ति पर अगले दिन सुबह पारण का नियम लागू न करें।
  • मकर संक्रान्ति की सभी परंपराओं को हर मासिक संक्रान्ति के लिए अनिवार्य न बताएं।
  • अपनी क्षमता से अधिक कठोर उपवास न रखें।
  • दान के लिए अनुपयोगी या खराब वस्तुएँ न दें।
  • नदी या जलाशय में प्लास्टिक, पैकेट और पूजा का कचरा न डालें।
  • दान करते समय किसी का अपमान या अपनी सहायता का दिखावा न करें।

नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।

प्रमुख तिथियाँ

प्रमुख संक्रान्ति और उनका महत्व

मकर संक्रान्ति

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व, जिस पर स्नान, दान और सूर्योपासना की विशेष परंपरा है।

विवरण देखें →

मेष संक्रान्ति

सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का अवसर, जो अनेक सौर पंचांगों में नववर्ष के समय से जुड़ा है।

विवरण देखें →

वृषभ संक्रान्ति

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश पर मनाई जाने वाली संक्रान्ति।

विवरण देखें →

कर्क संक्रान्ति

सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश का अवसर, जिसे परंपरागत पंचांग में दक्षिणायन से जोड़ा जाता है।

विवरण देखें →

वृश्चिक संक्रान्ति

सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश पर आने वाली संक्रान्ति।

विवरण देखें →

धनु संक्रान्ति

सूर्य के धनु राशि में प्रवेश का दिन, जिसका सूर्योपासना की परंपरा में महत्व है।

विवरण देखें →

मीन संक्रान्ति

सूर्य के मीन राशि में प्रवेश पर आने वाली संक्रान्ति, जिसके बाद मेष संक्रान्ति आती है।

विवरण देखें →
व्रत कथा

संक्रान्ति व्रत कथा

संक्रान्ति से जुड़ी कथाओं में मकर संक्रान्ति और गंगासागर की कथा विशेष रूप से सुनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ का घोड़ा लापता होने पर उनके साठ हजार पुत्र उसे खोजने निकले। घोड़ा उन्हें कपिल मुनि के आश्रम के पास मिला। उन्होंने बिना पूरी बात जाने मुनि पर आरोप लगाए और उनकी तपस्या में बाधा पहुँचाई। इसके कारण मुनि के तेज से वे भस्म हो गए। बाद में सगर के वंशज भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा को धरती पर लाने का संकल्प लिया। उन्होंने कठोर तप किया। गंगा के अवतरण का मार्ग खुला, लेकिन उनके प्रचंड वेग को धरती पर सँभालना कठिन था। तब भगीरथ ने भगवान शिव की आराधना की। शिवजी ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और फिर उनकी धारा पृथ्वी पर छोड़ी। भगीरथ गंगा को उस स्थान तक ले गए जहाँ उनके पूर्वजों की भस्म थी। गंगाजल के स्पर्श से उन्हें मुक्ति मिली। भगीरथ के प्रयास के कारण गंगा का एक नाम भागीरथी भी पड़ा। गंगासागर की तीर्थ-परंपरा में इस प्रसंग का विशेष महत्व है। मकर संक्रान्ति पर श्रद्धालु वहाँ स्नान करते हैं और कपिल मुनि के दर्शन करते हैं।

सभी प्रमुख संक्रान्ति की कथाएँ →

मंत्र

भगवान सूर्य मंत्र

सभी मंत्र →
🕉️ मंत्र
शिव मूल मंत्र
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🕉️ मंत्र
Hare Krishna Mahamantra
पूरा मंत्र पढ़ें →
शुभकामनाएँ

संक्रान्ति शुभकामना संदेश

सभी संदेश →
💐 संदेश

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार | Premchand Quotes – Quotes of Premchand – हिन्दी में मोटिवेशनल वचन

सभी संदेश देखें →
💐 संदेश

शिव नामावली 108 | भगवान शिव के 108 नाम (अर्थ सहित) | Shiv Namavali With Meaning & Jaap

सभी संदेश देखें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

संक्रान्ति की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?

पंचांग-सत्यापित
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
अयनांशलाहिड़ी (चित्रपक्ष)
तिथि का आधारसूर्योदयकालीन तिथि
सूची में तिथियाँ8
आराध्य देवभगवान सूर्य
अंतिम संशोधन23 अक्टूबर 2026

प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली संक्रान्ति वृश्चिक संक्रान्ति 16 नवंबर 2026 को है। स्थान के अनुसार तिथि में अंतर संभव है।
सूर्य के एक राशि से अगली राशि में प्रवेश को संक्रान्ति कहते हैं। इसका नाम उस राशि पर रखा जाता है जिसमें सूर्य प्रवेश करते हैं।
एक सौर वर्ष में 12 संक्रान्तियाँ होती हैं—मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन।
नहीं। संक्रान्ति सूर्य के राशि-परिवर्तन से तय होती है, इसलिए यह अलग-अलग चंद्र तिथियों पर पड़ सकती है।
हाँ। संक्रान्ति का क्षण सूर्य के राशि बदलने का समय है। पुण्यकाल स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए पंचांग में निर्धारित अवधि है।
संक्रान्ति पर भगवान सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार जप, पूजा तथा दान करते हैं।
सभी परिवारों में उपवास का एक जैसा नियम नहीं है। कुछ लोग व्रत रखते हैं, जबकि अन्य स्नान, सूर्य पूजन और दान करते हैं। अपनी परंपरा और क्षमता के अनुसार पालन करें।
पारण की विधि संबंधित संक्रान्ति और लिए गए संकल्प पर निर्भर करती है। सभी संक्रान्तियों में अगले दिन सुबह पारण का नियम नहीं है।
रात के संक्रान्ति-क्षण को ही स्नान-दान का समय न मानें। संबंधित संक्रान्ति के लिए स्थानीय पंचांग में दिया पुण्यकाल देखें।
तिल और गुड़ का विशेष संबंध मकर संक्रान्ति की कई क्षेत्रीय परंपराओं से है। हर मासिक संक्रान्ति के लिए इन्हें अनिवार्य न मानें।
नहीं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और पुण्यकाल के नियमों के अनुसार पर्व की तारीख बदल सकती है। संबंधित वर्ष का पंचांग देखें।
हाँ। तीर्थ जाना संभव न हो तो घर पर स्नान करके सूर्योपासना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान कर सकते हैं।

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