पौष हिन्दू पंचांग का दसवाँ महीना है। यह समय सर्दियों का होता है और इस दौरान सूर्य उपासना, भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व माना गया है। कई परिवारों में पौष के रविवार को सूर्यदेव की पूजा करने और सुबह उन्हें जल चढ़ाने की परंपरा है।
इस महीने सफला एकादशी और पौष पुत्रदा एकादशी के व्रत रखे जाते हैं। पौष पुत्रदा एकादशी संतान के सुख, स्वास्थ्य और मंगल की कामना से जुड़ी है। माह के शुक्ल पक्ष में शाकम्भरी नवरात्रि मनाई जाती है, जिसका समापन शाकम्भरी पूर्णिमा पर होता है। माँ शाकम्भरी को अन्न, फल और वनस्पतियों की देवी के रूप में पूजा जाता है।
पौष माह में मकर संक्रांति और पोंगल जैसे पर्व भी आते हैं। ये पर्व सूर्य के उत्तरायण होने, नई फसल और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने से जुड़े हैं। इस अवसर पर तिल, गुड़, खिचड़ी और गर्म वस्त्र दान करने की पुरानी परंपरा है। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान किया जाता है तथा इसी दिन से कई स्थानों पर माघ स्नान की शुरुआत भी मानी जाती है।