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मासिक कैलेंडर · 2026 हेमंत ऋतु

पौष माह 2026 के व्रत और त्योहार

सर्दियों के बीच आने वाला पौष माह सूर्य उपासना, व्रत और दान-पुण्य के लिए जाना जाता है। मकर संक्रांति, पौष पुत्रदा एकादशी और शाकम्भरी पूर्णिमा जैसे पर्व इस महीने को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से खास बनाते हैं।

24आगामी पर्व
4प्रमुख व्रत
भगवान सूर्य और भगवान विष्णुप्रमुख देवता
संक्षिप्त उत्तर

पौष माह 2026 कब है?

पौष माह 2026 में 25 दिसंबर 2026 से 22 जनवरी 2027 तक रहेगा। इस माह सफला एकादशी, पौष प्रदोष व्रत, पौष पुत्रदा एकादशी, शाकम्भरी नवरात्रि, पौष पूर्णिमा व्रत जैसे व्रत और गुरु गोबिन्द सिंह जयंती, मकर संक्रांति, पोंगल, शाकम्भरी पूर्णिमा जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। पूरी जानकारी देखें →

माह का संदर्भ

पौष माह का धार्मिक महत्व

पौष हिन्दू पंचांग का दसवाँ महीना है। यह समय सर्दियों का होता है और इस दौरान सूर्य उपासना, भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व माना गया है। कई परिवारों में पौष के रविवार को सूर्यदेव की पूजा करने और सुबह उन्हें जल चढ़ाने की परंपरा है।

इस महीने सफला एकादशी और पौष पुत्रदा एकादशी के व्रत रखे जाते हैं। पौष पुत्रदा एकादशी संतान के सुख, स्वास्थ्य और मंगल की कामना से जुड़ी है। माह के शुक्ल पक्ष में शाकम्भरी नवरात्रि मनाई जाती है, जिसका समापन शाकम्भरी पूर्णिमा पर होता है। माँ शाकम्भरी को अन्न, फल और वनस्पतियों की देवी के रूप में पूजा जाता है।

पौष माह में मकर संक्रांति और पोंगल जैसे पर्व भी आते हैं। ये पर्व सूर्य के उत्तरायण होने, नई फसल और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने से जुड़े हैं। इस अवसर पर तिल, गुड़, खिचड़ी और गर्म वस्त्र दान करने की पुरानी परंपरा है। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान किया जाता है तथा इसी दिन से कई स्थानों पर माघ स्नान की शुरुआत भी मानी जाती है।

मासिक पर्व सूची

पौष माह के व्रत-त्योहार

मासिक आचरण

पौष माह में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें

  • सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करें
  • भगवान विष्णु की पूजा और नाम-स्मरण करें
  • जरूरतमंदों को तिल, गुड़, अन्न और गर्म वस्त्र दान करें
  • व्रत के दिनों में सात्त्विक भोजन और संयम रखें
  • मकर संक्रांति पर सूर्यदेव और नई फसल के प्रति आभार प्रकट करें
  • पौष पूर्णिमा पर स्नान, पूजा और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें

क्या न करें

  • भोजन और अन्न का अनादर या अपव्यय न करें
  • किसी जरूरतमंद को भोजन या सहायता देने से मना न करें
  • व्रत के दौरान तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों से दूर रहें
  • क्रोध, अपशब्द और अनावश्यक विवाद से बचें
  • पूजा और दान को दिखावे का माध्यम न बनाएँ
  • स्थानीय पंचांग देखे बिना व्रत या त्योहार की तिथि तय न करें

स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यता के अनुसार नियमों में अंतर हो सकता है।

विश्वसनीयता

तिथियाँ और सामग्रियाँ कैसे तैयार की गई हैं?

Bhakti Sarovar पर व्रत और त्योहारों की तिथियाँ पारंपरिक पंचांग गणना — तिथि, पक्ष, मास, सूर्योदय और स्थान-आधारित समय — के आधार पर तैयार की जाती हैं। तिथि और समय स्थान, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पौष माह 2026 कब शुरू होगा?
पौष माह 2026 में 25 दिसंबर 2026 से प्रारंभ होगा।
पौष माह 2026 कब समाप्त होगा?
पौष माह 2026 में 22 जनवरी 2027 तक रहेगा।
पौष माह में कौन-कौन से व्रत आते हैं?
इस माह सफला एकादशी, पौष प्रदोष व्रत, पौष पुत्रदा एकादशी, शाकम्भरी नवरात्रि, पौष पूर्णिमा व्रत सहित कुल 24 व्रत-त्योहार आते हैं। पूरी सूची ऊपर दी गई है।
क्या पौष माह की तिथियाँ शहर के अनुसार बदल सकती हैं?
हाँ। तिथि और समय स्थान, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं। स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।