कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर मनाया जाने वाला श्री कमला प्राकट्योत्सव महासमृद्धि का उत्सव है। देवी कमला, भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति, भाग्य, प्रतिष्ठा और परोपकार की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। शास्त्र कहते हैं कि उनकी साधना से विद्या-कौशल में विस्तार, धन-ऐश्वर्य में वृद्धि और गर्भवती स्त्रियों को शिशु-रक्षा का वर मिलता है। स्थिर लक्ष्मी प्राप्त करने तथा परिवार-कल्याण के लिए साधक ‘कनकधारा स्तोत्र’ और ‘श्रीसूक्त’ का पारायण करते हैं, कमलगट्टे की माला पर श्री-मंत्र जपते हैं, तथा बिल्वपत्र-बिल्वफल से हवन कर देवी को प्रसन्न करते हैं। कमला को लक्ष्मी और षोडशी भी कहा जाता है; उनकी कृपा से धरणीपति-सामर्थ्य और पुरुषोत्तमत्व दोनों ही साध्य हो जाते हैं। कार्तिक की हल्की शीतलता और दीप-उल्लास के बीच यह आराधना गृह-आँगन में स्थायी समृद्धि और सौभाग्य का प्रकाश भर देती है।