आश्विन माह श्रद्धा, शक्ति-उपासना और उत्सव का महीना है। इसके कृष्ण पक्ष में पितरों को याद करते हुए श्राद्ध, तर्पण और दान किए जाते हैं। सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष पूरा होता है और इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्रि आरंभ होती है।
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। घरों और मंदिरों में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और कन्या पूजन की परंपरा है। इसके बाद विजयादशमी मनाई जाती है, जो भगवान राम की रावण पर विजय और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।
माह के अंत में शरद पूर्णिमा आती है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। कई परिवारों में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को कोजागर पूर्णिमा या कोजागरी पूजा के नाम से भी जाना जाता है।