कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश को समर्पित है, इसलिए भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर निर्जला उपवास रखते हैं और केवल फल, कंद‑मूल या वनस्पति‑उत्पाद ग्रहण करते हैं। संकष्टी का अर्थ है संकटों का हरण; मान्यता है कि इस व्रत से विघ्न, रोग और वित्त‑संकट घटते हैं तथा बुद्धि‑विवेक बढ़ता है। कार्तिक स्वयं पुण्यदायी माना गया है—इसी महीने में प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी विवाह और देव दीपावली जैसे उत्सव भी मनाए जाते हैं, जो भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक जागरण और उत्साह का संचार करते हैं। वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी, कार्तिक मास की धर्म‑परम्पराओं में अनुशासन, तपस्या और विश्वास का श्रेष्ठ संगम रचती है।