भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी पूरे देश में आस्था और उल्लास से मनाई जाएगी। प्रातः शुभ मुहूर्त में मिट्टी के गजानन घर‑घर व पंडालों में विराजते हैं; दस दिनों तक मोदक‑भोग, आरती, ढोल‑ताशे और “गणपति बाप्पा मोरया” की गूँज वातावरण में मंगल भरती रहती है। अनंत चतुर्दशी को जल‑विसर्जन के साथ भगवान को अगले वर्ष पुनः आमंत्रित किया जाता है। परम्परा बताती है कि भाद्रपद शुक्ल द्वितीया पर चाँद देखना शुभ नहीं होता; यदि अनजाने में दर्शन हो जाएँ तो अगली भोर दूध, दही या चावल जैसी श्वेत वस्तुओं का दान मिथ्या‑दोष शांत करता है। गणेश चतुर्थी का उद्देश्य सीधा है—विघ्नों का निवारण, बुद्धि‑विवेक का विकास और पारिवारिक समृद्धि की कामना।