हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in
आवर्ती व्रत · 2026–2027

चन्द्र दर्शन 2026–2027: तिथि, दर्शन समय और पूजा विधि

चन्द्र दर्शन 2026–2027 की तिथियाँ, शहर के अनुसार दर्शन समय, चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि, व्रत कथा, नियम और पारण की जानकारी पढ़ें।

🗓️

चन्द्र दर्शन कब है? — संक्षिप्त उत्तर

चन्द्र दर्शन अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले बढ़ते चंद्रमा के दर्शन का दिन है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर सूर्यास्त के बाद निर्धारित समय में चंद्रमा के दर्शन करते हैं, अर्घ्य देते हैं और प्रार्थना के बाद व्रत खोलते हैं। दर्शन का समय हर शहर में अलग-अलग होता है।

❝

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

— नवग्रह स्तोत्र
इस महीने — आश्विन मास

इस महीने की चन्द्र दर्शन कब है?

इस नवंबर महीने में चन्द्र दर्शन की तिथियाँ:

तारीखदिनतिथिनाम
11 नवंबर 2026बुधवारआश्विन, शुक्ल द्वितीयाचन्द्र दर्शन
🕉️ चंद्रदेव 📅 वर्ष में 7 तिथियाँ 🪔 व्रत एवं उपवास
महीने अनुसार

हर महीने चन्द्र दर्शन कब है?

तारीखदिनतिथिनाम
9 जनवरी 2027शनिवारमार्गशीर्ष, शुक्ल द्वितीयापौष चन्द्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
8 फरवरी 2027सोमवारपौष, शुक्ल द्वितीयामाघ चन्द्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
9 मार्च 2027मंगलवारमाघ, शुक्ल प्रतिपदाफाल्गुन चंद्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
8 मई 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल द्वितीयावैसाख चंद्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
6 जून 2027रविवारवैशाख, शुक्ल द्वितीयाज्येष्ठ चन्द्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
11 नवंबर 2026बुधवारआश्विन, शुक्ल द्वितीयाचन्द्र दर्शन
तारीखदिनतिथिनाम
10 दिसंबर 2026गुरुवारकार्तिक, शुक्ल प्रतिपदामार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन
पूर्ण सूची

चन्द्र दर्शन सूची 2026–2027

तारीखदिनतिथि / पक्षनामपारण
11 नवंबर 2026बुधवारआश्विन, शुक्ल द्वितीयाचन्द्र दर्शन12 नवंबर, प्रातः*देखें
10 दिसंबर 2026गुरुवारकार्तिक, शुक्ल प्रतिपदामार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन11 दिसंबर, प्रातः*देखें
9 जनवरी 2027शनिवारमार्गशीर्ष, शुक्ल द्वितीयापौष चन्द्र दर्शन10 जनवरी, प्रातः*देखें
8 फरवरी 2027सोमवारपौष, शुक्ल द्वितीयामाघ चन्द्र दर्शन10 फरवरी, प्रातः*देखें
9 मार्च 2027मंगलवारमाघ, शुक्ल प्रतिपदाफाल्गुन चंद्र दर्शन10 मार्च, प्रातः*देखें
8 मई 2027शनिवारचैत्र, शुक्ल द्वितीयावैसाख चंद्र दर्शन 9 मई, प्रातः*देखें
6 जून 2027रविवारवैशाख, शुक्ल द्वितीयाज्येष्ठ चन्द्र दर्शन7 जून, प्रातः*देखें

* पारण अगले दिन (द्वादशी/अगली तिथि) प्रातः, सूर्योदय के बाद — सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है; स्थानीय पंचांग देखें।

11नवंबर

चन्द्र दर्शन

बुधवार · आश्विन, शुक्ल द्वितीया

देखें
10दिसंबर

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन

गुरुवार · कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा

देखें
9जनवरी

पौष चन्द्र दर्शन

शनिवार · मार्गशीर्ष, शुक्ल द्वितीया

देखें
8फरवरी

माघ चन्द्र दर्शन

सोमवार · पौष, शुक्ल द्वितीया

देखें
9मार्च

फाल्गुन चंद्र दर्शन

मंगलवार · माघ, शुक्ल प्रतिपदा

देखें
8मई

वैसाख चंद्र दर्शन

शनिवार · चैत्र, शुक्ल द्वितीया

देखें
6जून

ज्येष्ठ चन्द्र दर्शन

रविवार · वैशाख, शुक्ल द्वितीया

देखें
तिथि समय

चन्द्र दर्शन आरंभ और समाप्ति

तारीखदिनतिथि आरंभ → समाप्ति
11 नवंबर 2026बुधवार11 नवंबर 10:59 PM → 12 नवंबर 12:08 AM
10 दिसंबर 2026गुरुवार10 दिसंबर 10:55 PM → 10 दिसंबर 11:46 PM
9 जनवरी 2027शनिवार9 जनवरी 11:11 PM → 10 जनवरी 12:28 AM
8 फरवरी 2027सोमवार8 फरवरी 11:36 PM → 10 फरवरी 1:08 AM
9 मार्च 2027मंगलवार9 मार्च 11:57 PM → 10 मार्च 12:52 AM
8 मई 2027शनिवार8 मई 12:30 AM → 8 मई 1:41 AM
6 जून 2027रविवार6 जून 12:46 AM → 6 जून 1:36 AM
महत्व

चन्द्र दर्शन क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

चन्द्र दर्शन अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले बढ़ते चंद्रमा के दर्शन की परंपरा है। अमावस्या की रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता। इसके बाद शुक्ल पक्ष में जब उसकी पतली-सी पहली कला सूर्यास्त के पश्चात दिखाई देती है, तो इसे नए चंद्र मास की शुभ शुरुआत माना जाता है। श्रद्धालु चंद्रदेव के दर्शन करके मानसिक शांति, संतुलन और पारिवारिक सुख की प्रार्थना करते हैं।

इस दिन व्रत रखने वाले लोग प्रातः संकल्प लेते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार उपवास या फलाहार करते हैं। सूर्यास्त के बाद निर्धारित दर्शन अवधि में चंद्रमा को देखकर जल या दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद चंद्र मंत्र का जप, पूजा और प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूरा किया जाता है।

चन्द्र दर्शन की तिथि हमेशा केवल प्रतिपदा या द्वितीया देखकर तय नहीं की जा सकती। इसका वास्तविक समय चंद्रमा की स्थिति, सूर्यास्त और चंद्रास्त पर निर्भर करता है। पहली चंद्र कला थोड़े समय के लिए ही दिखाई देती है, इसलिए अपने शहर की सही दर्शन अवधि देखना आवश्यक है।

क्षेत्रीय नाम

चन्द्र दर्शन को विभिन्न क्षेत्रों में क्या कहते हैं?

क्षेत्र / परंपरानाम
उत्तर भारतनया चाँद दर्शन
महाराष्ट्रचंद्र दर्शन
कर्नाटकचंद्र दर्शन
आंध्र प्रदेशचंद्र दर्शनम्
तमिलनाडुपिरई दर्शनम्
दक्षिण भारतचंद्र दर्शनम्
व्रत विधि

चन्द्र दर्शन व्रत विधि और नियम

व्रत का संकल्प: चन्द्र दर्शन के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। चंद्रदेव का ध्यान करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या फलाहार का संकल्प लें। निर्जल व्रत रखना अनिवार्य नहीं है।

पूजा की तैयारी: शाम को सूर्यास्त से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लें। एक स्वच्छ पात्र में जल या दूध मिश्रित जल रखें। अक्षत, सफेद फूल, चंदन, दीप, धूप, मिश्री और खीर भी पूजा में रखी जा सकती है।

दर्शन का समय: अपने शहर की चन्द्र दर्शन अवधि पहले से देख लें। चंद्रमा सामान्यतः सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में कुछ समय के लिए दिखाई देता है। दर्शन का समय प्रतिदिन और प्रत्येक स्थान पर अलग होता है।

चंद्रदेव को अर्घ्य: चंद्रमा दिखाई देने पर शांत मन से दर्शन करें। जल से अर्घ्य दें और सफेद फूल, अक्षत या चंदन अर्पित करें। ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।

प्रार्थना और भोग: चंद्रदेव से मन की शांति, स्वस्थ जीवन और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। खीर, दूध, मिश्री या किसी सात्विक मिठाई का भोग लगाकर परिवार में प्रसाद बाँटें।

व्रत का पारण: चंद्रमा के दर्शन और पूजा पूरी होने के बाद व्रत खोला जाता है। यदि मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई न दे तो निर्धारित दर्शन अवधि समाप्त होने तक प्रतीक्षा करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूरी करें।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति कठोर या निर्जल उपवास न रखें। वे सामान्य सात्विक भोजन करते हुए शाम की पूजा और चन्द्र दर्शन में भाग ले सकते हैं।

पारण

चन्द्र दर्शन पारण समय और नियम

  • चन्द्र दर्शन का व्रत उसी शाम चंद्रमा के दर्शन के बाद खोला जाता है
  • सूर्यास्त के बाद अपने शहर की चन्द्र दर्शन अवधि देखें
  • चंद्रमा दिखाई देने पर जल या दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें
  • चंद्रदेव की पूजा और प्रार्थना पूरी करने के बाद पारण करें
  • बादलों के कारण चंद्रमा न दिखे तो निर्धारित दर्शन अवधि समाप्त होने तक प्रतीक्षा करें
  • स्थानीय परंपरा के अनुसार फल, खीर या सात्विक भोजन से व्रत खोलें
  • इस व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी या प्रातः करने का नियम नहीं है
  • दर्शन और पारण का समय अपने शहर के अनुसार ही देखें
⚠️ यहाँ कोई निश्चित घड़ी-समय नहीं दिया गया है — पारण मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और द्वादशी समाप्ति पर निर्भर करता है। कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भोजन एवं आचरण

चन्द्र दर्शन व्रत में क्या करें क्या ना करें?

✅ क्या करें

  • प्रातः स्नान करके व्रत या पूजा का संकल्प लें
  • अपने शहर की सही चन्द्र दर्शन अवधि पहले से देखें
  • सूर्यास्त से पहले पूजा की सामग्री तैयार रखें
  • चंद्रमा का दर्शन पश्चिम दिशा में करने का प्रयास करें
  • चंद्रदेव को जल या दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें
  • सफेद फूल, अक्षत, चंदन और मिश्री अर्पित करें
  • ॐ सोमाय नमः मंत्र का जप करें
  • मन की शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें
  • अपनी क्षमता के अनुसार उपवास या फलाहार करें
  • पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें
  • बादल होने पर निर्धारित दर्शन अवधि तक प्रतीक्षा करें
  • अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखें

⛔ क्या ना करें

  • किसी दूसरे शहर का चन्द्र दर्शन समय न अपनाएं
  • सूर्यास्त से पहले चंद्रमा के दर्शन का समय न मानें
  • चंद्रमा को खोजने में असुरक्षित या ऊँचे स्थान पर न चढ़ें
  • बादल होने पर गलत दिशा या अनुमानित समय पर अर्घ्य न दें
  • स्वास्थ्य ठीक न होने पर जबरन निर्जल उपवास न रखें
  • पूजा और प्रसाद का अनादर न करें
  • क्रोध, झूठ और कटु वचन से बचें
  • व्रत के नियमों को लेकर दूसरों पर दबाव न डालें
  • चन्द्र दर्शन को संकष्टी चतुर्थी के चंद्र अर्घ्य से न मिलाएं
  • भाद्रपद गणेश चतुर्थी के चंद्र-दर्शन नियम को सामान्य मासिक व्रत पर लागू न करें
  • अगले दिन द्वादशी या प्रातः पारण वाला नियम लागू न करें
  • बच्चों, बुजुर्गों या बीमार लोगों पर कठोर व्रत न थोपें

नोट: क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं — अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।

प्रमुख तिथियाँ

प्रमुख चन्द्र दर्शन और उनका महत्व

आश्विन चन्द्र दर्शन

आश्विन मास के आरंभ में अमावस्या के बाद दिखाई देने वाले नए चंद्रमा का दर्शन

विवरण देखें →

पौष चन्द्र दर्शन

पौष मास का प्रथम चन्द्र दर्शन और चंद्रदेव की मासिक पूजा का अवसर

विवरण देखें →

माघ चन्द्र दर्शन

माघ मास के आरंभ में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख और शांति की प्रार्थना की जाती है

विवरण देखें →

फाल्गुन चन्द्र दर्शन

फाल्गुन मास में अमावस्या के बाद प्रथम बार दिखाई देने वाले चंद्रमा का दर्शन

विवरण देखें →

वैशाख चन्द्र दर्शन

वैशाख मास के प्रथम चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने की परंपरा

विवरण देखें →

ज्येष्ठ चन्द्र दर्शन

ज्येष्ठ मास के आरंभ में चंद्रदेव की पूजा और मासिक व्रत का दिन

विवरण देखें →
व्रत कथा

चन्द्र दर्शन व्रत कथा

चंद्रदेव के घटने-बढ़ने और उनके महत्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, प्रजापति दक्ष की सत्ताईस पुत्रियाँ थीं। इन सभी का विवाह चंद्रदेव से हुआ था। ये सत्ताईस पुत्रियाँ आकाश के सत्ताईस नक्षत्रों का प्रतीक मानी जाती हैं। विवाह के बाद चंद्रदेव अपनी सभी पत्नियों के साथ रहने लगे, लेकिन उन्हें रोहिणी से विशेष प्रेम था। वे अपना अधिकांश समय रोहिणी के साथ बिताते और दूसरी पत्नियों की उपेक्षा करते थे। इससे दुखी होकर अन्य पत्नियाँ अपने पिता दक्ष के पास पहुँचीं और उन्हें पूरी बात बताई। दक्ष ने चंद्रदेव को समझाया कि उन्हें अपनी सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। चंद्रदेव ने उनकी बात मानने का आश्वासन दिया, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर रोहिणी के साथ ही अधिक समय बिताने लगे। जब बार-बार समझाने पर भी उनका व्यवहार नहीं बदला, तो दक्ष क्रोधित हो गए। उन्होंने चंद्रदेव को क्षीण होने का शाप दे दिया। शाप के प्रभाव से चंद्रदेव की चमक और शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगी। चंद्रमा के कमजोर होने से पृथ्वी पर औषधियों, वनस्पतियों और जीवों पर भी प्रभाव पड़ने लगा। देवताओं ने चिंतित होकर चंद्रदेव को भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी। चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। चंद्रदेव ने उनसे शाप से मुक्ति की प्रार्थना की। भगवान शिव ने बताया कि दक्ष का शाप पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन उसका प्रभाव संतुलित किया जा सकता है। भगवान शिव ने वरदान दिया कि चंद्रमा एक पक्ष में धीरे-धीरे घटेगा और दूसरे पक्ष में फिर बढ़ेगा। कृष्ण पक्ष में उसकी कलाएँ कम होंगी, अमावस्या पर वह दिखाई नहीं देगा और शुक्ल पक्ष में फिर प्रतिदिन बढ़ता हुआ पूर्णिमा को पूर्ण रूप में दिखाई देगा। भगवान शिव ने चंद्रदेव को अपने मस्तक पर स्थान भी दिया, इसलिए उन्हें चंद्रशेखर कहा गया। अमावस्या के बाद दिखाई देने वाला छोटा-सा चंद्रमा इसी नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। चन्द्र दर्शन के दिन श्रद्धालु उस प्रथम चंद्र कला को देखकर जीवन में शांति, संतुलन और नई ऊर्जा की प्रार्थना करते हैं।

सभी प्रमुख चन्द्र दर्शन की कथाएँ →

मंत्र

चंद्रदेव मंत्र

सभी मंत्र →
🕉️ मंत्र
शिव मूल मंत्र
पूरा मंत्र पढ़ें →
🕉️ मंत्र
Hare Krishna Mahamantra
पूरा मंत्र पढ़ें →
शुभकामनाएँ

चन्द्र दर्शन शुभकामना संदेश

सभी संदेश →
💐 संदेश

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार | Premchand Quotes – Quotes of Premchand – हिन्दी में मोटिवेशनल वचन

सभी संदेश देखें →
💐 संदेश

शिव नामावली 108 | भगवान शिव के 108 नाम (अर्थ सहित) | Shiv Namavali With Meaning & Jaap

सभी संदेश देखें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चन्द्र दर्शन की तिथियाँ कैसे तय की गई हैं?

पंचांग-सत्यापित
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
अयनांशलाहिड़ी (चित्रपक्ष)
तिथि का आधारसूर्योदयकालीन तिथि
सूची में तिथियाँ7
आराध्य देवचंद्रदेव
अंतिम संशोधन01 नवंबर 2026

प्रत्येक तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय हर नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर किसी व्रत की तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चन्द्र दर्शन 11 नवंबर 2026 (बुधवार) को है। स्थान के अनुसार तिथि में अंतर संभव है।
अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले बढ़ते चंद्रमा के दर्शन को चन्द्र दर्शन कहा जाता है।
चन्द्र दर्शन अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा या द्वितीया को सूर्यास्त के पश्चात किया जाता है।
यह व्रत और पूजा चंद्रदेव को समर्पित है। श्रद्धालु उनसे मानसिक शांति, संतुलन और पारिवारिक सुख की प्रार्थना करते हैं।
इसका समय सूर्यास्त, चंद्रमा की स्थिति और चंद्रास्त पर निर्भर करता है। इसलिए हर शहर में दर्शन की अवधि अलग हो सकती है।
सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के दर्शन, अर्घ्य और पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोला जाता है।
बादलों या मौसम के कारण चंद्रमा न दिखे तो अपने शहर की निर्धारित दर्शन अवधि तक प्रतीक्षा करें और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें।
स्वच्छ पात्र में जल या दूध मिश्रित जल लेकर चंद्रमा की ओर मुख करके अर्घ्य दिया जाता है। जल में अक्षत और सफेद फूल भी रखे जा सकते हैं।
चंद्रदेव को खीर, दूध, मिश्री, चावल या सफेद रंग की सात्विक मिठाई अर्पित की जा सकती है।
निर्जल व्रत अनिवार्य नहीं है। व्यक्ति अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपवास या फलाहार कर सकता है।
धार्मिक परंपरा में भाद्रपद गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता है। यह मासिक चन्द्र दर्शन व्रत से अलग प्रसंग है।
सामान्यतः हर अमावस्या के बाद एक चन्द्र दर्शन होता है। इसलिए वर्ष में प्रायः 12 और अधिकमास होने पर 13 अवसर हो सकते हैं।
नहीं। चन्द्र दर्शन अमावस्या के बाद पहली चंद्र कला से जुड़ा है, जबकि संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर रखा जाने वाला गणेश व्रत है।

यह पेज शेयर करें

चन्द्र दर्शन की तिथियाँ अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

Facebook Twitter Telegram
⭐

गूगल पर भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाएं

गूगल पर खोजते समय भक्ति सरोवर के परिणाम में ⋮ मेनू दबाकर "More from this site" चुनें — गूगल भविष्य में हमारे परिणाम प्राथमिकता से दिखाएगा।

पसंदीदा स्रोत बनाएं →