प्रथम श्रावण सोमवार व्रत — महत्व, कथा और परंपरा
श्रावण मास, जो लगभग जुलाई-अगस्त की वर्षा ऋतु में आता है, शिव-भक्तों के लिए वर्ष का सबसे पावन काल माना जाता है। इस मास का प्रथम सोमवार व्रत-उपवास की शृंखला का प्रारम्भ करता है। भक्त सूर्योदय से तीसरे प्रहर तक निर्जल या फलाहारी रहकर शिव-पार्वती की अर्चना करते हैं। 108 बेलपत्रों पर ‘राम’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करना इस दिन का मुख्य अनुष्ठान है। मान्यता है कि विवाह में बाधा, आयु या स्वास्थ्य सम्बन्धी कष्ट होने पर सावन सोमवार का व्रत विशेष फलदायी सिद्ध होता है। इसी काल में कांवड़ यात्रा भी प्रारम्भ होती है, जब श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिव-अभिषेक करते हैं। सावन का यह विधान आत्म-शुद्धि, संयम और भक्ति का पारम्परिक मार्ग दिखाता है।