श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी ‘पुत्रदा एकादशी’ के रूप में विख्यात है। वर्ष में यह व्रत दो बार आता है—पहली पौष शुक्ल पक्ष में, दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में। उत्तर भारत में जहाँ पौष पुत्रदा अधिक सराही जाती है, वहीं दक्षिण भारत में श्रावण पुत्रदा को विशिष्ट महत्त्व प्राप्त है। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन निराहार रहकर श्रीहरि का पूजन करने से वाजपेयी यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और सुयोग्य संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। व्रती प्रातः स्नान के बाद विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या ‘ॐ नारायणाय नमः’ मंत्र का जप करते हैं, सायंकाल दीपदान और तुलसी दल अर्पण कर आरती उतारते हैं। इस तप, संयम और श्रद्धा से घर में सुख-समृद्धि तथा वंश-वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।