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श्रावण पुत्रदा एकादशी

11 सितंबर 2027 · शनिवार श्रावण, शुक्ल एकादशी

श्रावण माह 2026 में पुत्रदा एकादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 कब है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 शनिवार, 11 सितंबर 2027 को मनाई जाएगी। श्रावण पुत्रदा एकादशी की तिथि श्रावण, शुक्ल एकादशी है। श्रावण पुत्रदा एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:43 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक11 सितंबर 2027
तिथिश्रावण, शुक्ल एकादशी
पूजा मुहूर्त05:43 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल एकादशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ाशोभन
संक्षिप्त परिचय

श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व और उत्सव

श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल एकादशी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगशोभन
करणवणिज
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:07 – 04:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:43 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:30 – 12:19 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:27 – 17:17 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:19 – 18:31 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:48 – 10:21 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 11 Sep 02:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:07–04:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:43–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:30 – 12:19
तिथि समाप्त 12 Sep 04:18 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:19–18:31

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्रावण पुत्रदा एकादशी — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी ‘पुत्रदा एकादशी’ के रूप में विख्यात है। वर्ष में यह व्रत दो बार आता है—पहली पौष शुक्ल पक्ष में, दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में। उत्तर भारत में जहाँ पौष पुत्रदा अधिक सराही जाती है, वहीं दक्षिण भारत में श्रावण पुत्रदा को विशिष्ट महत्त्व प्राप्त है। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन निराहार रहकर श्रीहरि का पूजन करने से वाजपेयी यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और सुयोग्य संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। व्रती प्रातः स्नान के बाद विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या ‘ॐ नारायणाय नमः’ मंत्र का जप करते हैं, सायंकाल दीपदान और तुलसी दल अर्पण कर आरती उतारते हैं। इस तप, संयम और श्रद्धा से घर में सुख-समृद्धि तथा वंश-वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

आवर्ती व्रत

अन्य एकादशी तिथियाँ

सभी एकादशी तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 सोमवार श्रावण, कृष्ण एकादशी आज देखें
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, शुक्ल एकादशी 15 दिन शेष देखें
इन्दिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, कृष्ण एकादशी 29 दिन शेष देखें
पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन, शुक्ल एकादशी 45 दिन शेष देखें
रमा एकादशी 5 नवंबर 2026 गुरुवार आश्विन, कृष्ण एकादशी 59 दिन शेष देखें
उत्पन्ना एकादशी व्रत 4 दिसंबर 2026 शुक्रवार कार्तिक, कृष्ण एकादशी 88 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — एकादशी हब पेज पर देखें।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्रावण पुत्रदा एकादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल एकादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्रावण पुत्रदा एकादशी 11 सितंबर 2027 (शनिवार) को है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।