श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली ‘कामिका एकादशी’ शुभ कार्य-सिद्धि का विशेष अवसर मानी जाती है। शास्त्रों का मत है कि इस दिन श्रीहरि की पूजा और निराहार उपवास से वर्षों से अधूरी कामनाएँ भी पूर्ण होती हैं। व्रती प्रातः स्नान के बाद शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की विधिपूर्वक अर्चना करते हैं। ‘श्रीधर’, ‘हरि’, ‘माधव’, ‘मधुसूदन’ जैसे दिव्य नामों से स्तुति, तुलसी दल अर्पण तथा गीता-पाठ कल्याणकारी माना गया है। रात्रि में दीपदान और भजन-कीर्तन से वातावरण पवित्र होता है। परिणत-काल में द्वादशी के उदय होने से पूर्व फलाहार से व्रत का पारण किया जाता है, जिससे जीवन में धर्म, अर्थ और काम—तीनों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है।