दामोदर द्वादशी — महत्व, कथा और परंपरा
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि ‘दामोदर द्वादशी’ कहलाती है, जिसे भगवान विष्णु के दामोदर नाम के स्मरण से जोड़ा जाता है। श्रावण का माह स्वयं हरीतिमा और भक्ति का समय है; इस काल में पुत्रदा (या पवित्र) एकादशी का उपवास रखने वाले भक्त अगले दिन द्वादशी पर दामोदर रूपी विष्णु का पूजन कर व्रत का पारण करते हैं। परंपरा है कि भगवान कृष्ण को पंचामृत से स्नान करा कर तुलसी-दल तथा कपास के सूत का पवित्रक अर्पित किया जाए, फिर शिव-लिंग पर नैवेद्य चढ़ा कर प्रसाद ग्रहण किया जाए। उपवास तोड़ते समय परिवार और पड़ोसियों को मीठा बाँटना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस साधना से संतान-सुख, आरोग्य और मन की कामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।