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दामोदर द्वादशी

12 सितंबर 2027 · रविवार श्रावण, शुक्ल द्वादशी

श्रावण माह 2026 में दामोदर द्वादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

दामोदर द्वादशी 2027 कब है?

दामोदर द्वादशी 2027 रविवार, 12 सितंबर 2027 को मनाई जाएगी। दामोदर द्वादशी की तिथि श्रावण, शुक्ल द्वादशी है। दामोदर द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:43 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक12 सितंबर 2027
तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त05:43 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रश्रवणशोभन
संक्षिप्त परिचय

दामोदर द्वादशी का महत्व और उत्सव

दामोदर द्वादशी श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रश्रवण
योगशोभन
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

दामोदर द्वादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:07 – 04:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:43 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:19 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:26 – 17:16 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:18 – 18:30 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:33 – 18:06 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 12 Sep 04:18 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:07–04:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:43–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:19
तिथि समाप्त 13 Sep 06:20 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:18–18:30

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

दामोदर द्वादशी — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि ‘दामोदर द्वादशी’ कहलाती है, जिसे भगवान विष्णु के दामोदर नाम के स्मरण से जोड़ा जाता है। श्रावण का माह स्वयं हरीतिमा और भक्ति का समय है; इस काल में पुत्रदा (या पवित्र) एकादशी का उपवास रखने वाले भक्त अगले दिन द्वादशी पर दामोदर रूपी विष्णु का पूजन कर व्रत का पारण करते हैं। परंपरा है कि भगवान कृष्ण को पंचामृत से स्नान करा कर तुलसी-दल तथा कपास के सूत का पवित्रक अर्पित किया जाए, फिर शिव-लिंग पर नैवेद्य चढ़ा कर प्रसाद ग्रहण किया जाए। उपवास तोड़ते समय परिवार और पड़ोसियों को मीठा बाँटना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस साधना से संतान-सुख, आरोग्य और मन की कामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

दामोदर द्वादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में दामोदर द्वादशी 12 सितंबर 2027 (रविवार) को है।
दामोदर द्वादशी श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।