श्रावण के तृतीय सोमवार पर अर्द्धनारीश्वर शिव की विशेष आराधना का विधान है। पूजा के समय गंगाजल, दूध और श्वेत पुष्प चढ़ाकर “ॐ महादेवाय सर्वकार्यसिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नमः” मंत्र की 11 मालाएँ जपना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस साधना से अखंड सौभाग्य, दीर्घ आयु, संतान-प्राप्ति व सुरक्षा, कन्या-विवाह में सहजता, अकाल-मृत्यु से बचाव तथा आकस्मिक धन-लाभ का आशीर्वाद मिलता है। सावन भर जलाभिषेक करते समय यदि प्रतिदिन केवल एक बिल्वपत्र भी शिवलिंग पर चढ़ा दिया जाए तो तीन जन्मों तक के पाप क्षीण हो जाते हैं; वहीं अखंड (त्रिपत्री) बिल्वपत्र चढ़ाने का फल कोटि बिल्वपत्र अर्पण के बराबर माना गया है। इस प्रकार तृतीय सोमवार का व्रत साधकों को कर्तव्य-सिद्धि और जीवन-कल्याण का सशक्त अवसर प्रदान करता है।