श्रावण शुक्ल अष्टमी को आने वाली मासिक दुर्गाष्टमी शक्ति-उपासना का पर्व है। इस दिन साधक प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र व रोली लगाते हैं, फिर माँ दुर्गा के समक्ष अक्षत, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित कर “ॐ दुर्गायै नमः” का जप करते हैं। रात्रि में गृह-शांति हेतु रसोई में सफेद चावल की ढेरी पर गौ-घृत का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है, जिसे पूर्ण अष्टमी-रात्रि तक जलाए रखना शुभ माना गया है। मान्यता है कि दीप की अखंड ज्योति नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है। साथ ही ग्यारह सुहागिनों को लाल चूड़ियाँ और सिंदूर भेंट करने से घर में लक्ष्मी-प्रवेश, धन-वृद्धि और सौभाग्य का आशीष मिलता है। सरल अनुष्ठानों से युक्त यह व्रत परिवार को सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।