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प्रथम मंगला गौरी व्रत

25 जुलाई 2027 · मंगलवार श्रावण, कृष्ण षष्ठी

श्रावण माह 2026 में प्रथम मंगला गौरी व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

प्रथम मंगला गौरी व्रत 2027 कब है?

प्रथम मंगला गौरी व्रत 2027 मंगलवार, 25 जुलाई 2027 को मनाई जाएगी। प्रथम मंगला गौरी व्रत की तिथि श्रावण, कृष्ण षष्ठी है। प्रथम मंगला गौरी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:22 – 08:03 तक रहेगा।

दिनांक25 जुलाई 2027
तिथिश्रावण, कृष्ण षष्ठी
पूजा मुहूर्त05:22 – 08:03
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, कृष्ण षष्ठीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतामंगला गौरी
वार-देवतासूर्य देवमंगलवार
नक्षत्ररेवतीसुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

प्रथम मंगला गौरी व्रत का महत्व और उत्सव

प्रथम मंगला गौरी व्रत श्रावण, कृष्ण षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन मंगला गौरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण षष्ठी
नक्षत्ररेवती
योगसुकर्मा
करणवणिज
ऋतुवर्षादक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

प्रथम मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:46 – 04:34 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:22 – 08:03 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:37 – 12:31 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:00 – 17:54 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:00 – 19:12 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 17:06 – 18:47 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Jul 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:46–04:34
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:22–08:03
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:37 – 12:31
तिथि समाप्त 15 Jul 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:00–19:12

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

प्रथम मंगला गौरी व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास, जो वर्षा ऋतु के मध्य, लगभग जुलाई-अगस्त, में आता है, मंगलवारी उपवासों की शृंखला ‘प्रथम मंगला गौरी व्रत’ से आरम्भ करता है। देवी पार्वती के मंगलमय रूप की यह उपासना विवाह-संबन्धी बाधाओं, विशेषकर मंगल दोष, को शांत करने हेतु अत्यन्त फलदायी मानी गई है। प्रातः स्नान के बाद व्रती एक समय भोजन का संकल्प लेकर चौकी पर स्थापित मंगला गौरी का पंचोपचार पूजन करते हैं। पूजा में सोलह दीप, सोलह पुष्प, सोलह सुपारी आदि, कुल सोलह प्रकार की सामग्रियाँ, अर्पित होती हैं; इन्हें ‘सोलह श्रृंगार’ का प्रतीक माना जाता है। अंत में “मम पुत्र-पौत्र-सौभाग्य-वृद्धये श्रीमंगला-गौरी-प्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं व्रतम्” कहकर कथा श्रवण किया जाता है। श्रद्धा और नियम का यह मार्ग स्त्री-जीवन में सौभाग्य, आरोग्य तथा पारिवारिक समृद्धि की राह प्रशस्त करता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

प्रथम मंगला गौरी व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, कृष्ण षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमंगला गौरी
अंतिम संशोधन19 Aug 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में प्रथम मंगला गौरी व्रत 25 जुलाई 2027 (मंगलवार) को है।
प्रथम मंगला गौरी व्रत श्रावण, कृष्ण षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।