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श्रावण पूर्णिमा व्रत

14 सितंबर 2027 · मंगलवार श्रावण, शुक्ल चतुर्दशी

श्रावण माह 2026 में पूर्णिमा व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्रावण पूर्णिमा व्रत 2027 कब है?

श्रावण पूर्णिमा व्रत 2027 मंगलवार, 14 सितंबर 2027 को मनाई जाएगी। श्रावण पूर्णिमा व्रत की तिथि श्रावण, शुक्ल चतुर्दशी है। श्रावण पूर्णिमा व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:44 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक14 सितंबर 2027
तिथिश्रावण, शुक्ल चतुर्दशी
पूजा मुहूर्त05:44 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल चतुर्दशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान चंद्रदेव
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रधनिष्ठासुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

श्रावण पूर्णिमा व्रत का महत्व और उत्सव

श्रावण पूर्णिमा व्रत श्रावण, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रधनिष्ठा
योगसुकर्मा
करणगर
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

श्रावण पूर्णिमा व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:08 – 04:56 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:44 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:18 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:25 – 17:14 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:16 – 18:28 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 14:58 – 16:31 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Sep 09:08 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:08–04:56
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:44–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:18
तिथि समाप्त 15 Sep 09:48 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:16–18:28

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्रावण पूर्णिमा व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास की पूर्णिमा देश के भौगोलिक विस्तार के अनुसार अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है—दक्षिण में नारयली पूर्णिमा या अवनी अवित्तम, मध्य क्षेत्र में कजरी पूनम, उत्तर में रक्षाबन्धन और गुजरात में पवित्रोपना। चंद्रदेव इस तिथि के स्वामी हैं, जबकि श्रवण नक्षत्र की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती मानी जाती हैं; इसलिए आज विद्या-वर्धन और चंद्र-शांति दोनों का अनुष्ठान विशेष फल देता है। यज्ञोपवीत संस्कार का नवीनीकरण, उपनयन और रक्षासूत्र बाँधने की परम्परा भी इसी दिन निभाई जाती है। चंद्रदोष शमन हेतु दूध मिश्रित जल से अर्घ्य अर्पित करें, गाय को हरा चारा तथा चींटियों-मछलियों को आटा या दाने दें। माना जाता है कि इस व्रत और दान से मन की शांति, पारिवारिक सौहार्द और मानसिक दृढ़ता बढ़ती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्रावण पूर्णिमा व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल चतुर्दशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान चंद्रदेव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्रावण पूर्णिमा व्रत 14 सितंबर 2027 (मंगलवार) को है।
श्रावण पूर्णिमा व्रत श्रावण, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।