श्रावण मास के चौथे मंगलवार को रखा जाने वाला चतुर्थ मंगला गौरी व्रत विवाह-सम्बन्धी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से प्रख्यात है। ज्योतिष मानता है कि मंगल दोष से उत्पन्न विलंब या रुकावट को शांत करने हेतु इस दिन माँ गौरी के मंगलमय रूप का पूजन परम फलदायी होता है। व्रती प्रातः स्नान के बाद चौकी पर अष्टगंध और चमेली की कलम से भोजपत्र पर लिखे ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ यंत्र की स्थापना करते हैं, फिर इस मंत्र का 108 बार जप कर सोलह दीप व सोलह नैवेद्य अर्पित करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस साधना से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर तथा विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है; साथ-साथ गृहकलह और अन्य कष्टों की भी समाप्ति होती है।