श्रावण शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी को ‘रिक्ता तिथि’ भी कहा गया है। शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन किसी भी मंगल-कार्य से पूर्व विघ्नहर्ता गणेश का पूजन अनिवार्य है, अन्यथा कार्य अधूरा रह सकता है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें, फिर मिट्टी अथवा धातु की गणेश-प्रतिमा स्थापित कर उस पर सिंदूर, दूर्वा, मोदक, नारियल व लड्डू अर्पित करें। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का कम-से-कम 108 बार जप विघ्न-बाधा निवारण और घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यदि नौकरी या व्यापार में रुकावटें आ रही हों तो निकट के गणेश मंदिर जाकर सिंदूर व दूर्वा चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। संध्या के समय चंद्र-दर्शन से पूर्व गणेश अथर्वशीर्ष या अर्गलस्तोत्र का पाठ कर व्रत पूर्ण करें।