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ऋग्वेद उपाकर्म

13 सितंबर 2027 · सोमवार श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी

श्रावण माह 2026 में ऋग्वेद उपाकर्म कब है?

संक्षिप्त उत्तर

ऋग्वेद उपाकर्म 2027 कब है?

ऋग्वेद उपाकर्म 2027 सोमवार, 13 सितंबर 2027 को मनाई जाएगी। ऋग्वेद उपाकर्म की तिथि श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी है। ऋग्वेद उपाकर्म की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:43 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक13 सितंबर 2027
तिथिश्रावण, शुक्ल त्रयोदशी
पूजा मुहूर्त05:43 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल त्रयोदशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रश्रवणअतिगण्ड
संक्षिप्त परिचय

ऋग्वेद उपाकर्म का महत्व और उत्सव

ऋग्वेद उपाकर्म श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल त्रयोदशी
नक्षत्रश्रवण
योगअतिगण्ड
करणकौलव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

ऋग्वेद उपाकर्म के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:07 – 04:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:43 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:18 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:26 – 17:15 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:17 – 18:29 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:15 – 08:48 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 13 Sep 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:07–04:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:43–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:18
तिथि समाप्त 14 Sep 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:17–18:29

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

ऋग्वेद उपाकर्म — महत्व, कथा और परंपरा

ऋग्वेद उपाकर्म वैदिक अध्ययन की नयी सत्र-दीक्षा है, जो श्रावण शुक्ल पंचमी—श्रवण नक्षत्र—पर होती है। प्राचीन गुरुकुलों में इसी दिन वर्षावकाश के बाद शिष्य गुरु के पास लौटकर ऋचा-पाठ पुनः आरम्भ करते थे। समकालीन परम्परा में यज्ञोपवीतधारी साधक पुराना जनेऊ उतार कर नया धारण करते, त्रिपुण्ड लगाते, आचमन-संकल्प के बाद ऋषि-तर्पण और कम-से-कम 1,008 बार गायत्री-जप करते हैं। यह संस्कार याद दिलाता है कि ‘ब्राह्मणत्व’ जन्म से नहीं, सतत स्वाध्याय और साधना से अर्जित होता है। अंत में गुरुदक्षिणा अर्पित कर वेद-अध्यान का संकल्प दोहराया जाता है, जिससे ऋचा-स्वाध्याय, चारित्रिक अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का नवचेतन प्रारम्भ हो सके।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

ऋग्वेद उपाकर्म की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल त्रयोदशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में ऋग्वेद उपाकर्म 13 सितंबर 2027 (सोमवार) को है।
ऋग्वेद उपाकर्म श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।