पौष मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी ‘मासिक दुर्गाष्टमी’ कहलाती है। साल भर आने वाली इन अष्टमियों में, शारदीय नवरात्र की ‘महाष्टमी’ सर्वोपरि मानी जाती है, पर हर माह की दुर्गाष्टमी भी शक्ति‑साधना का महत्त्वपूर्ण दिन है। पौष में सूर्य धनु राशि में रहते हैं, ऋतु हेमंत की सर्द तासीर लिये रहती है और तिल‑दान, सूर्य‑अर्घ्य तथा गंगा‑स्नान का विशेष पुण्य बताया गया है; इसी पावन वातावरण में देवी‑उपासना साधक के मन को स्थिर करती है। इस तिथि पर भक्त दुर्गा के काली, भवानी, जगदम्बा तथा नवदुर्गा रूपों का विधिवत पूजन करते हैं और दिन‑भर निराहार व्रत रखते हैं। पूजा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ, कीर्तन तथा “ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षिणी स्वाहा” जैसे मंत्रों का जप माँ का विशेष आशीर्वाद दिलाता है। विश्वास है कि नियमित मासिक दुर्गाष्टमी‑व्रत से साधक के जीवन में बाधाएँ दूर होती हैं और साहस, स्वास्थ्य व समृद्धि में वृद्धि होती है।