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पोंगल

16 जनवरी 2027 · शनिवार पौष, शुक्ल अष्टमी

पौष माह 2027 में पोंगल कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पोंगल 2027 कब है?

पोंगल 2027 शनिवार, 16 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। पोंगल की तिथि पौष, शुक्ल अष्टमी है। पोंगल की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:45 – 08:54 तक रहेगा।

दिनांक16 जनवरी 2027
तिथिपौष, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:45 – 08:54
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिपौष, शुक्ल अष्टमीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतासूर्यदेव
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रअश्विनीसिद्ध
संक्षिप्त परिचय

पोंगल का महत्व और उत्सव

पोंगल पौष, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रअश्विनी
योगसिद्ध
करणबव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

पोंगल के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:09 – 05:57 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:45 – 08:54 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:46 – 12:29 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:04 – 16:47 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:42 – 17:54 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 09:26 – 10:47 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 15 Jan 09:14 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:09–05:57
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:45–08:54
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:46 – 12:29
तिथि समाप्त 16 Jan 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:42–17:54

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पोंगल — महत्व, कथा और परंपरा

दक्षिण भारत, विशेषकर तमिल नाडु, में मनाया जाने वाला पोंगल, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति) पर आरंभ होता है और तमिल पंचांग के ‘थाई’ माह के पहले चार दिनों तक चलता है। ‘पोंगल’ शब्द का एक अर्थ ‘उबालना’ है; अतः गुड़ और चावल से बने उफनते पकवान को सूर्यदेव को अर्पित करना ही इसकी केन्द्रीय रस्म है। पहला दिन भोगी पोंगल होता है, जब इन्द्रदेव से वर्षा के लिए आभार जताया जाता है। दूसरे दिन सूर्य पोंगल में खेतों की नई उपज से सूर्य की पूजा की जाती है। तीसरे दिन का मट्टू पोंगल कृषक-सखा नंदी बैल को समर्पित है, उसकी साज-सज्जा व आराधना के साथ उत्सव चरम पर पहुँचता है। अंतिम दिन कन्या पोंगल या ‘कनुम’ में महिलाएँ परिवार-कल्याण की कामना से काली मंदिर में विशेष अनुष्ठान करती हैं। उत्तर भारत की मकर संक्रांति की तरह, पोंगल भी खेतों में परिश्रम के फल का उल्लासपूर्ण उत्सव है, जो ऋतुओं के परिवर्तन और नई फसल की समृद्धि का संदेश देता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पोंगल की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिपौष, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवसूर्यदेव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में पोंगल 16 जनवरी 2027 (शनिवार) को है।
पोंगल पौष, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।