पौष मास की कड़ी सर्दी में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष चतुर्दशी ‘मासिक शिवरात्रि’ कहलाती है। इस रात को किया जाने वाला उपवास और रुद्राभिषेक भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा दिलाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि इस व्रत से क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लोभ जैसे आंतरिक दोष समाप्त होते हैं, जबकि मन में शांति और परिवार में सुख‑संपन्नता बढ़ती है। पौष की लंबी रात में जागरण कर “ॐ नमः शिवाय” का जप, बेलपत्र और कच्चे दूध से अभिषेक करना अनिवार्य माना गया है। मान्यता है कि निरंतर एक वर्ष तक मासिक शिवरात्रि का पालन करने से संतान‑सुख, रोग‑मुक्ति तथा दाम्पत्य‑जीवन के क्लेश दूर होते हैं, साथ ही अधूरे कार्य सिद्धि की ओर बढ़ते हैं। इस माह में लिया गया संकल्प अधिक फल देता है, क्योंकि शीतकाल साधना‑संयम का काल माना गया है।