पौष मास की अमावस्या के अगले संध्या‑काल में जब क्षीण‑सा नवचन्द्र आकाश में पहली बार प्रकट होता है, उस घड़ी को ‘चन्द्र दर्शन’ कहा जाता है। यह क्षण हिन्दू परम्परा में अत्यन्त पुण्यकारी माना गया है; देश भर के श्रद्धालु बड़े भाव‑भक्ति से इसका अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि चन्द्रदेव की आराधना से घर‑परिवार में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है तथा अन्य देवताओं की कृपा भी सहज ही मिलती है। व्रती दिन‑भर संयम रखकर सूर्यास्त के तुरंत बाद नवचन्द्र को अर्घ्य अर्पित करता है, फिर चन्द्रमा का प्रथम दर्शन कर प्रार्थना करता है। चन्द्रदेव ज्ञान, विवेक और मन के अधिपति हैं; अतः उनके पूजन से सौभाग्य बढ़ता है और जीवन‑पथ पर सफलता सुगम हो जाती है।