नरेन्द्रनाथ दत्त, जिन्हें हम स्वामी विवेकानन्द के नाम से जानते हैं, 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्मे और आज भी युवाओं के लिए अक्षय प्रेरणा‑स्रोत बने हुए हैं। 1985 से भारत सरकार ने उनके जन्म‑दिवस को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ घोषित किया, ताकि उनका तेजस्वी चिंतन हर पीढ़ी तक पहुँचे। श्री रामकृष्ण परमहंस के इस शिष्य ने राष्ट्र‑सेवा को ईश्वर‑भक्ति का पर्याय माना और समाज‑सुधार को कर्म‑योग में पिरोया। 1893 में शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन के मंच पर “सिस्टर्स ऐंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” से शुरू हुआ उनका ओजस्वी भाषण आज भी विश्व‑पटल पर गूँजता है; इसी संबोधन ने भारत को अध्यात्म और उदार मानवता की सशक्त आवाज़ दी। उनका अमर संदेश—“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत”—आज के युवाओं को आत्म‑विश्वास, सेवा‑भाव और राष्ट्र‑समर्पण की राह दिखाता है।