पौष मास की कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहा जाता है, जिसे पौष एकादशी भी कहते हैं। वराह पुराण में वर्णित है कि चौबीस एकादशियों में यह तिथि विशेष फलदायी मानी गई है, क्योंकि ‘सफला’ का अर्थ ही समृद्धि और सफलता है। दशमी की संध्या से व्रती अन्न‑त्याग कर, अगली प्रातः स्नान‑ध्यान के बाद पीत वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु तथा श्रीकृष्ण का तुलसी‑दल, पीत पुष्प और पंचमेवा से पूजन करता है। दिन‑भर फलाहार या निर्जल उपवास रखते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप तथा रात्रि‑जागरण करने से सौभाग्य, धन‑वृद्धि और कार्य‑सिद्धि के द्वार खुलते हैं। द्वादशी के प्रातः निर्धनों में अन्न‑वस्त्र दान कर पारण करने से व्रत पूर्ण होता है और जीवन में स्थायी उन्नति तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।