पौष मास हिन्दू पंचांग का दसवाँ महीना है। हेमंत ऋतु का यह चरण कड़ाके की ठंड लेकर आता है; इसलिए गर्म‑पौष्टिक आहार और भोर का सूर्य‑स्नान तन‑मन के लिए बड़ा हितकारी माना जाता है। पंचांग के अनुसार जिस नक्षत्र में पूर्णिमा का चंद्रमा हो, उसी पर मास का नाम रखा जाता है; पौष‑पूर्णिमा पर चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहने से इसे ‘पौष’ कहा गया। शास्त्र निर्देश देते हैं कि इस अवधि में भगवान भास्कर की ‘भग’ रूप में प्रतिदिन अर्घ्य अर्पित करते हुए “ॐ आदित्याय नमः” का जप करें। पौष में सफला एकादशी, पौष पुत्रदा एकादशी और मकर‑संक्रान्ति जैसी तिथियाँ आती हैं, जो आरोग्य, तेज तथा यश प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।