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मण्डला पूजा

27 दिसंबर 2026 · रविवार मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी

पौष माह 2026 में मण्डला पूजा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

मण्डला पूजा 2026 कब है?

मण्डला पूजा 2026 रविवार, 27 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। मण्डला पूजा की तिथि मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी है। मण्डला पूजा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:42 – 08:48 तक रहेगा।

दिनांक27 दिसंबर 2026
तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी
पूजा मुहूर्त06:42 – 08:48
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान अय्यप्पा
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रआश्लेषाविष्कम्भ
संक्षिप्त परिचय

मण्डला पूजा का महत्व और उत्सव

मण्डला पूजा मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण चतुर्थी
नक्षत्रआश्लेषा
योगविष्कम्भ
करणबव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

मण्डला पूजा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:06 – 05:54 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:42 – 08:48 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:38 – 12:20 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:51 – 16:33 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:28 – 17:40 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:56 – 17:16 शुभ कार्य में टालें सावधानी
मण्डला पूजा प्रारंभ 17 Nov 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:06–05:54
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:42–08:48
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:38 – 12:20
मण्डला पूजा समापन 27 Dec 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:28–17:40

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

मण्डला पूजा — महत्व, कथा और परंपरा

सबरीमला के भगवानअयप्पा मंदिर में मनाया जाने वालामण्डलापूजा’ पर्व धनुर्मास के ग्यारहवें अथवा बारहवें दिन, 41‑दिवसीय कठोर व्रत की पूर्णाहुति के रूप में आता है। यह व्रत मलयालम पंचांग के वृश्चिकमास के प्रथम दिन—जब सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है—से आरम्भ होकर सूर्य के धनु राशि में पहुँचने तक चलता है। संकल्प लेते समय भक्त शरीर पर चंदन का लेप लगाते हैं, अयप्पन् को प्रिय तुलसी या रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं और सत्य, ब्रह्मचर्य, शाकाहार तथा पवित्रता का कठोर पालन करते हैं। साधना‑काल में प्रतिदिन प्रातः स्नान, जप‑कीर्तन और सेवाभाव अनिवार्य माना गया है। समापन दिवस पर भगवानगणेश का आवाहन कर दीपआराधना, भजन‑कीर्तन तथा घी‑अभिषेक सम्पन्न होते हैं। मान्यता है कि इस अनुशासित तपस्या से मन‑तन शुद्ध होकर साधक को साहस, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का वरदान प्राप्त होता है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

मण्डला पूजा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान अय्यप्पा
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)मार्गशीर्ष
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह पौष माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन मार्गशीर्ष माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में मण्डला पूजा 27 दिसंबर 2026 (रविवार) को है।
मण्डला पूजा मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।