पौष मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली ‘मासिक शिवरात्रि’ शिव‑भक्तों के लिए साधना का सरल, पर प्रभावी अवसर है। सूर्य इस समय धनु राशि में रहता है; हेमंत की ठिठुरन के बीच तिल‑दान और सूर्य‑अर्घ्य की परम्परा चरम पर होती है। ऐसे पवित्र वातावरण में रुद्र‑पूजन मन को शांति और दृढ़ता दोनों देता है। पूजन विधि सरल है: दिन‑भर निराहार रहकर संध्याकाल में बिल्वपत्र, जल, आक‑पुष्प व धतूरा चढ़ाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें। रात्रि के चारों प्रहर दूध, दही, घृत और शहद से अभिषेक करना पुण्यदायी माना गया है; इस काल में अग्निहोत्र भी लाभकारी है। शास्त्र कहते हैं कि इस व्रत से क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान व लोभ क्षीण होते हैं; दाम्पत्य‑कलह शांत होता है, संतान‑सुख व आरोग्य मिलता है, और अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी का वरदान प्राप्त होता है।