पौष मास हिन्दू पंचांग का दसवाँ महीना है; शीत अपने चरम पर रहता है और तिल‑दान, सूर्य‑अर्घ्य व गंगा‑स्नान का विशेष पुण्य बताया गया है। सूर्य इस समय धनु राशि में होने से धर्म‑कर्म पर खास बल दिया जाता है। इसी मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी ‘पौष स्कन्द षष्ठी’ कहलाती है, जब शिव‑पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवसेना‑पति भगवान कार्तिकेय की आराधना की जाती है। ज्योतिष मानता है कि षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह, दोनों पर इन्हीं का अधिकार है और दक्षिण दिशा भी इनकी है। जिन जातकों की कुण्डली में कर्क राशि स्थित नीच‑मंगल अशुभ फल देता हो, वे इस दिन व्रत रखकर मंगल को सबल कर सकते हैं। पूजा‑विधि सरल है: प्रातः स्नान‑संकल्प के बाद अक्षत‑दूर्वा अर्पित करें और बादाम‑नारियल से बनी मिठाइयों का नैवेद्य चढ़ाएँ। विश्वास है कि यह व्रत पराक्रम, स्वास्थ्य और भूमि‑संबंधी कार्यों में सफलता दिलाता है।