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पौष स्कंद षष्ठी

13 जनवरी 2027 · बुधवार मार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी

पौष माह 2027 में स्कंद षष्ठी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पौष स्कंद षष्ठी 2027 कब है?

पौष स्कंद षष्ठी 2027 बुधवार, 13 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। पौष स्कंद षष्ठी की तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी है। पौष स्कंद षष्ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:46 – 08:54 तक रहेगा।

दिनांक13 जनवरी 2027
तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त06:46 – 08:54
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान कार्तिकेय
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रपूर्व भाद्रपदवरीयान
संक्षिप्त परिचय

पौष स्कंद षष्ठी का महत्व और उत्सव

पौष स्कंद षष्ठी मार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पंचमी
नक्षत्रपूर्व भाद्रपद
योगवरीयान
करणबालव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

पौष स्कंद षष्ठी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:10 – 05:58 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:46 – 08:54 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:45 – 12:28 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:02 – 16:45 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:40 – 17:52 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:06 – 13:26 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 13 Jan 01:01 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:10–05:58
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:46–08:54
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:45 – 12:28
तिथि समाप्त 14 Jan 01:48 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:40–17:52

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पौष स्कंद षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा

पौष मास हिन्दू पंचांग का दसवाँ महीना है; शीत अपने चरम पर रहता है और तिल‑दान, सूर्य‑अर्घ्य व गंगा‑स्नान का विशेष पुण्य बताया गया है। सूर्य इस समय धनु राशि में होने से धर्म‑कर्म पर खास बल दिया जाता है। इसी मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी ‘पौष स्कन्द षष्ठी’ कहलाती है, जब शिव‑पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवसेना‑पति भगवान कार्तिकेय की आराधना की जाती है। ज्योतिष मानता है कि षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह, दोनों पर इन्हीं का अधिकार है और दक्षिण दिशा भी इनकी है। जिन जातकों की कुण्डली में कर्क राशि स्थित नीच‑मंगल अशुभ फल देता हो, वे इस दिन व्रत रखकर मंगल को सबल कर सकते हैं। पूजा‑विधि सरल है: प्रातः स्नान‑संकल्प के बाद अक्षत‑दूर्वा अर्पित करें और बादाम‑नारियल से बनी मिठाइयों का नैवेद्य चढ़ाएँ। विश्वास है कि यह व्रत पराक्रम, स्वास्थ्य और भूमि‑संबंधी कार्यों में सफलता दिलाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पौष स्कंद षष्ठी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कार्तिकेय
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में पौष स्कंद षष्ठी 13 जनवरी 2027 (बुधवार) को है।
पौष स्कंद षष्ठी मार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।