पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाने वाला कूर्म द्वादशी पर्व भगवान विष्णु के दूसरे, कच्छप अवतार का स्मरण कराता है। पौष, हेमंत ऋतु का अंतिम महीना है; इसी काल में सूर्य उत्तरायण होने की तैयारी करता है, जिसे आध्यात्मिक जागरण का संकेत माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से जन्म‑जन्मांतर के पाप क्षीण होते हैं और साधक को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा बताती है कि समुद्र‑मंथन के समय मंद्राचल पर्वत को सहारा देने हेतु विष्णु ने कच्छप रूप धारण किया था। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम् ज़िले का श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर इस अवतार को समर्पित है, जहाँ द्वादशी पर विशेष अभिषेक, पंचामृत स्नान और दान‑पुण्य की परंपरा निभायी जाती है।