पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जो विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह व्रत पौष मास में आता है, जो शीत ऋतु का प्रमुख महीना होता है और धार्मिक दृष्टि से विष्णु भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु का व्रत और पूजन करने से सुंदर, योग्य और स्वस्थ संतान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत निर्जल, निराहार या फलाहार विधि से किया जा सकता है। अगले दिन द्वादशी को किसी ज़रुरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है। पूजा में गंगाजल, तुलसी दल, तिल, फूल और पंचामृत से श्री विष्णु की अर्चना करनी चाहिए। पौष पुत्रदा एकादशी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में नई आशा और संतुलन लाने का माध्यम भी है।