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पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी

30 दिसंबर 2026 · बुधवार मार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी

पौष माह 2026 में श्री भैरव कालाष्टमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी 2026 कब है?

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी 2026 बुधवार, 30 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी की तिथि मार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी है। पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:43 – 08:50 तक रहेगा।

दिनांक30 दिसंबर 2026
तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी
पूजा मुहूर्त06:43 – 08:50
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान भैरव
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनीसौभाग्य
संक्षिप्त परिचय

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी का महत्व और उत्सव

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी मार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण सप्तमी
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी
योगसौभाग्य
करणबव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:07 – 05:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:43 – 08:50 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:39 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:53 – 16:35 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:30 – 17:42 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:00 – 13:19 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 30 Dec 12:36 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:07–05:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:43–08:50
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:39 – 12:21
तिथि समाप्त 31 Dec 12:32 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:30–17:42

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा

पौषमास की ठिठुरती सर्दी में आने वाली श्रीकालभैरवकालाष्टमी—कृष्णपक्षअष्टमी—भगवान शिव के उग्ररूप कालभैरव की आराधना का विशेष अवसर है। शास्त्रों में कालभैरव को कालजयी और तंत्रसाधना का अधिपति कहा गया है; उनकी पूजा से शनि, मंगल और राहु के प्रतिकूल प्रभाव शांत होते हैं। नारदपुराण बताता है कि भैरवउपासना से रोग, दुःख और भय दूर होकर मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। पौष के ठंडे संध्याकाल में पीपल‑वृक्ष के नीचे बैठकर महामृत्युंजय मंत्र की सात मालाएँ जपना सर्वत्र रक्षा देता है। वर्ष भर कुल बारह कालाष्टमी मनाई जाती हैं, पर पौष‑कालाष्टमी का तप‑जप विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह माह स्वयं अनुशासन और साधना के लिए विख्यात है।  

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान भैरव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)मार्गशीर्ष
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह पौष माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन मार्गशीर्ष माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी 30 दिसंबर 2026 (बुधवार) को है।
पौष श्री कालभैरव कालाष्टमी मार्गशीर्ष, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।