कृष्ण पक्ष की हर चतुर्दशी को मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि साधक को भीतर-बाहर दोनों ही तरह से नयी ऊर्जा से भर देती है। मान्यता है कि इस व्रत से काम, क्रोध, लोभ, मोह के बंधन ढीले पड़ जाते हैं और मन सकारात्मक दिशा में बढ़ता है। शिवलिंग पर जलाभिषेक तो अनिवार्य ही समझिए—बोलते हैं, इससे वैवाहिक जीवन की अड़चनें भी स्वतः दूर हो जाती हैं। शिवपुराण स्पष्ट कहता है: सच्चे मन से रखा गया यह व्रत हर इच्छा पूरी करने का सामर्थ्य रखता है। नियम पुरुष-स्त्री, दोनों के लिए समान हैं। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें, मंदिर जाकर भगवान शंकर, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय व नंदी का पूजन करें। शिवपुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा या किसी भी शिव-श्लोक का पाठ कीजिए—गहराई से किया गया पाठ स्वयं ही फल देगा।